न्यूयॉर्क। अमेरिका ने ईरान से युद्ध में अब तक कम से कम 81 एयरक्राफ्ट नष्ट हुए हैं या फिर उन्हें नुकसान हुआ है। इस नुकसान की कुल कीमत 3.3 बिलियन डॉलर (319 अरब रुपए) तक आंकी गई है। निशाना बनाए गए विमानों में अमेरिकी एयरफोर्स के कुछ सबसे एडवांस्ड विमान भी शामिल हैं। इनमें F-35A लाइटनिंग II स्टील्थ फाइटर और 12 F-15E स्ट्राइक ईगल जेट हैं। यह या तो नष्ट हो गए या डैमेज हो गए। न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस की रिसर्च सर्विस ने इस नुकसान की जनकारी दी है।
फ्रेंडली फायर में भी विमान बने निशाना
F-15E के नुकसान में वे तीन विमान भी शामिल हैं जिन्हें 2 मार्च को कुवैत के ऊपर 'फ्रेंडली-फायर' (अपनी ही सेना की गोलीबारी) की घटना में मार गिराया गया था। खबर है कि पिछले महीने ईरान के ऊपर एक और F-15E को मार गिराया गया था। F-15E (कीमत 30 मिलियन डॉलर से ज्यादा है) उन विमानों में शामिल था जो इस टकराव से प्रभावित हुए। क्योंकि इस युद्ध ने पूरे क्षेत्र में अमेरिकी सेना और सैन्य ठिकानों को खतरे में डाल दिया था, उनपर लगातार हमले हुए।
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जॉर्डन पर हमले में भी F-15E को नुकसान पहुंचा
9 और 10 सितंबर को जॉर्डन में मुवाफक साल्टी एयर बेस पर ईरानी हवाई हमलों के दौरान आठ अन्य F-15E विमानों को मामूली नुकसान पहुंचा था। रिपोर्ट के मुताबिक, उन डैमेज विमानों को बाद में फिर से सर्विस में शामिल कर लिया गया। खोए हुए एयरक्राफ्ट में सबसे ज्यादा संख्या MQ-9 रीपर ड्रोन की है। अमेरिका ने कम से कम 45 ऐसे बिना पायलट वाले एयरक्राफ्ट खो गए हैं। इनमें हर एक की कीमत 30 मिलियन डॉलर से 50 मिलियन डॉलर के बीच आंकी गई है। अमेरिकी सेना रीपर का इस्तेमाल खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी करने और टोह लेने के मिशन के साथ-साथ मिसाइल हमले करने के लिए भी करती है।
अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बरकरार
पश्चिम एशिया में महीनों से टेंशन बना हुआ है। सऊदी अरब में नए हमले हो रहे हैं, गाजा में हिंसा जारी है और अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यमन के ईरान-समर्थित हूथी विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब में मिलिट्री ठिकानों और एयरपोर्ट्स पर बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। इनमें रियाद का किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी शामिल है। वहीं, सऊदी अरब ने कहा कि उसने रियाद के उत्तर में एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही रोक दिया। ये हमले ऐसे समय में हुए जब सऊदी सेना और सहयोगी यमनी सैनिकों ने हूतियों के खिलाफ एक बड़ा हमला तेज कर दिया है।
ईरान युद्ध का असर छिपाने की कोशिश
अमेरिकी डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने आरोप लगाया है कि ईरान युद्ध के असर को छिपाने के लिए एक अभूतपूर्व और असंवैधानिक कोशिश की जा रही है। क्रिस मर्फी ने यह आरोप तब लगाया गया जब रक्षा विभाग ने उन्हें मध्य पूर्व में अमेरिका के अहम मिलिट्री बेस, कतर के अल-उदीद एयर बेस जाने की इजाजत नहीं दी। अपनी यात्रा के दौरान सऊदी अरब के रियाद में पत्रकारों से बात करते हुए मर्फी ने कहा, इस यात्रा से मुझे पक्का हो गया है कि इस युद्ध की कीमत और इसके नतीजों को कांग्रेस और अमेरिकी लोगों से छिपाने के लिए अभूतपूर्व और असंवैधानिक कोशिश चल रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जब वे उस इलाके में थे, तो पेंटागन ने युद्ध के बारे में उन्हें जानकारी देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, सीनेट में अपने कार्यकाल के दौरान कभी ऐसी चीज नहीं देखी। यह जान-बूझकर चीजों को छिपाने की एक मुहिम का हिस्सा है।