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US-ईरान समझौते के बाद खुला होर्मुज का रास्ता,दो महीने बाद फिर शुरू हुआ ईरानी तेल का निर्यात

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट से ईरानी तेल का निर्यात फिर शुरू हो गया है। करीब दो महीने की नाकाबंदी के बाद तेल टैंकरों की आवाजाही बहाल हुई है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिख रहा है और कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है।
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दो महीने बाद फिर शुरू हुआ ईरानी तेल का निर्यात
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता खुल गया है। इसके परिणामस्वरूप, दो महीने के अंतराल के बाद ईरानी तेल का निर्यात फिर से शुरू हो गया है।

नई दिल्ली। करीब दो महीने तक चले तनाव, सैन्य टकराव और समुद्री नाकाबंदी के बाद आखिरकार होर्मुज स्ट्रेट से राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद ईरानी कच्चे तेल का निर्यात फिर शुरू हो गया है। लंबे समय से रुके तेल टैंकर अब एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बाजारों की ओर बढ़ने लगे हैं। इस घटनाक्रम को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण पिछले दो महीनों से इस समुद्री मार्ग पर गतिविधियां लगभग ठप पड़ गई थीं। अमेरिकी नौसेना की निगरानी और सुरक्षा प्रतिबंधों के चलते ईरानी तेल से लदे कई जहाज बंदरगाहों और समुद्री सीमाओं में फंसे हुए थे। अब हालात सामान्य होने की दिशा में बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।

दो सुपरटैंकर लेकर निकले लाखों बैरल तेल

समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने वाली संस्था टैंकरट्रैकर्स की रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी के दो विशाल वीएलसीसी सुपरटैंकर-डायोना और हीरो-2-होर्मुज क्षेत्र से निकल चुके हैं। इन दोनों जहाजों में कुल 38 लाख बैरल से ज्यादा ईरानी कच्चा तेल लदा हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन जहाजों की गतिविधियों की पुष्टि 15 जून 2026 के एआईएस डेटा और सैटेलाइट तस्वीरों से हुई है। यही नहीं, इसके बाद एक और स्वेजमैक्स श्रेणी का टैंकर करीब 10 लाख बैरल तेल लेकर रवाना हुआ है। इस तरह दो महीने की रुकावट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार की ओर ईरानी तेल की आपूर्ति फिर शुरू हो गई है।

नाकाबंदी हटते ही समुद्री गतिविधियां हुईं तेज

अप्रैल 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के दौरान होर्मुज क्षेत्र में विशेष सुरक्षा लाइन बनाई गई थी। इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखी जा रही थी। शांति समझौते के बाद अमेरिकी नौसेना ने अपनी नाकाबंदी हटानी शुरू कर दी है, जिससे तेल टैंकरों को रास्ता मिल गया है। समुद्री ट्रैकिंग रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी का एक अन्य जहाज "स्ट्रीम" भी अरब सागर में आगे बढ़ रहा है। यह जहाज पिछले सात सप्ताह से पाकिस्तान के विशेष आर्थिक क्षेत्र के पास इंतजार कर रहा था। अब उसके भी ईरान पहुंचने और नए तेल कार्गो के साथ वापसी की संभावना जताई जा रही है।

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शांति समझौते ने बाजार को दी बड़ी राहत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी नेतृत्व के बीच हुए समझौते को अंतरराष्ट्रीय बाजारों ने सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है। लंबे समय से यह आशंका बनी हुई थी कि यदि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद हो गया तो दुनिया भर में तेल संकट पैदा हो सकता है। लेकिन समझौते के बाद यह खतरा काफी हद तक टल गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट खुलने से अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन को राहत मिलेगी और ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौटेगी। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इसलिए यहां किसी भी प्रकार की रुकावट का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर पड़ता है।

कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट

शांति समझौते का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला है। पिछले कुछ महीनों से भू-राजनीतिक तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई थीं। लेकिन समझौते के बाद बाजार में तेजी से गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव अब 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया है और यह करीब 79 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 76 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। मर्बन क्रूड की कीमतों में भी सात प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखी गई है।

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महंगाई पर भी पड़ सकता है असर

तेल की कीमतों में आई नरमी का असर सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चा तेल लंबे समय तक सस्ता बना रहता है तो कई देशों में महंगाई पर दबाव कम हो सकता है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को भी इससे फायदा मिलने की उम्मीद है। फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर बनी हुई है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ यह समझौता कितने समय तक कायम रहता है। लेकिन इतना तय है कि दो महीने बाद होर्मुज स्ट्रेट से फिर शुरू हुई तेल आपूर्ति ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत जरूर दी है।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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