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US-Iran Peace Deal :107 दिन बाद थमा युद्ध, 4% टूटा कच्चा तेल; क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?

अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिन बाद शांति समझौते की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 4% से ज्यादा गिरावट आई है। होर्मुज स्ट्रेट खुलने से तेल सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद बढ़ी है। जानिए भारत में पेट्रोल-डीजल, LPG, महंगाई और शेयर बाजार पर इसका क्या असर पड़ सकता है।
107 दिन बाद थमा युद्ध, 4% टूटा कच्चा तेल; क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
नई दिल्ली। करीब साढ़े तीन महीने तक पश्चिम एशिया को अस्थिर करने वाले अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है और शांति समझौते पर सहमति बनने का दावा किया गया है। इस खबर के सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि वैश्विक शेयर बाजारों में जोरदार तेजी देखने को मिली।

दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने की दिशा में भी सहमति बनने की खबर है। यही वजह है कि निवेशकों ने राहत की सांस ली और तेल की सप्लाई को लेकर बना बड़ा जोखिम अचानक कम हो गया।

ट्रंप का दावा- ईरान के साथ समझौता पूरा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर दावा किया कि, ईरान के साथ समझौता लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष युद्ध रोकने और क्षेत्र में सामान्य हालात बहाल करने पर सहमत हैं।
 
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से पूरी तरह खोल दिया जाएगा और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी भी हटाई जाएगी। उनके बयान के बाद वैश्विक बाजारों में तुरंत प्रतिक्रिया देखने को मिली।
 
जानकारी के मुताबिक, अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर आने वाले दिनों में स्विट्जरलैंड में हो सकते हैं। हालांकि आधिकारिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर होना अभी बाकी है, लेकिन बाजार ने इस खबर को सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है|
 

Donald Trump

107 दिन बाद थमी जंग

पश्चिम एशिया में तनाव की शुरुआत फरवरी के अंत में हुई थी। इसके बाद सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों का सिलसिला शुरू हो गया। संघर्ष बढ़ने के साथ ही तेल सप्लाई को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ गई थी। युद्ध के दौरान होर्मुज स्ट्रेट के आसपास तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता देखने को मिली। कई देशों को तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने का डर सताने लगा था। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई थीं।

समझौते के बाद धड़ाम हुए तेल के दाम

अमेरिका-ईरान समझौते की खबर सामने आने के बाद सोमवार को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
ब्रेंट क्रूड करीब 4 फीसदी टूटकर 83-84 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में पहुंच गया।
 
अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड में 4.5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई और यह 80-81 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गया।
मुरबान क्रूड भी गिरकर लगभग 83 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया।
 
तेल बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह सप्लाई बाधित होने का खतरा कम होना है। निवेशकों को अब उम्मीद है कि क्षेत्र में तेल उत्पादन और निर्यात सामान्य रूप से जारी रहेगा।

क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर समुद्री रास्ते से होने वाली तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। जब भी इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तेल बाजार में घबराहट देखने को मिलती है। युद्ध के दौरान भी यही हुआ था। निवेशकों को आशंका थी कि, अगर यह मार्ग लंबे समय तक प्रभावित रहा तो वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है। अब इसके दोबारा खुलने की संभावना से तेल बाजार को बड़ी राहत मिली है।
 

crude oil

शेयर बाजारों में भी लौटी रौनक

तेल की कीमतों में गिरावट का असर केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहा। एशियाई और वैश्विक शेयर बाजारों में भी सकारात्मक माहौल देखने को मिला।
  • जापान का निक्केई इंडेक्स 4 फीसदी से अधिक उछला।
  • दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी 4 फीसदी से ज्यादा मजबूत हुआ।
  • अमेरिकी और यूरोपीय फ्यूचर्स बाजारों में भी बढ़त दर्ज की गई।
निवेशकों को उम्मीद है कि, तेल सस्ता होने से वैश्विक महंगाई पर दबाव कम होगा और कई देशों के केंद्रीय बैंक भविष्य में ब्याज दरों को लेकर नरम रुख अपना सकते हैं।

भारत के लिए क्यों है बड़ी राहत?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक माना जाता है।
 
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से-
  • देश का आयात बिल कम हो सकता है।
  • पेट्रोलियम कंपनियों पर लागत का दबाव घट सकता है।
  • महंगाई दर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
  • पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों पर राहत मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
  • रुपए पर दबाव कम हो सकता है।

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क्या पेट्रोल-डीजल होगा सस्ता?

फिलहाल देश की सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है।
 
प्रमुख शहरों में ताजा कीमतें
 

शहर

पेट्रोल (₹/लीटर)

डीजल (₹/लीटर)

दिल्ली

102.12

95.20

मुंबई

111.21

97.83

कोलकाता

113.51

99.02

चेन्नई

107.77

99.55

 
हालांकि रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।

हाल ही में बढ़े थे तेल के दाम

अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा और पिछले महीने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी की गई। मई के मध्य से कुछ ही हफ्तों में पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 7.5 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। ऐसे में अब लोगों को उम्मीद है कि वैश्विक हालात सामान्य होने पर कीमतों में राहत मिल सकती है।
Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...

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