उत्तर प्रदेश के संभल जिले का बिछौली गांव एक बार फिर सुर्खियों में है। गुरुवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सरकारी जमीन पर बने ईदगाह और इमामबाड़ा को बुलडोजर से गिरा दिया। इस दौरान पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा और माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
सुबह करीब 9 बजे प्रशासनिक टीम चार बुलडोजरों के साथ गांव पहुंची। एसडीएम निधि पटेल की मौजूदगी में अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। बुलडोजरों ने ईदगाह और इमामबाड़ा के ढांचे को गिराना शुरू कर दिया। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए।
स्थिति को देखते हुए पूरे इलाके को पुलिस छावनी में बदल दिया गया था। आरआरएफ के साथ भारी पुलिस बल तैनात रहा। जिला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई भी मौके पर पहुंचे और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कोर्ट के आदेश के तहत की गई है।
तहसीलदार न्यायालय ने जनवरी में इस जमीन को खाली कराने का आदेश दिया था। इसके बाद प्रशासन ने पहले से तैयारी शुरू कर दी थी और लेखपालों की टीम गठित की गई थी। 31 जनवरी को सार्वजनिक नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन तय समय में किसी ने स्वामित्व का दावा नहीं किया।
राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, गाटा संख्या 1242 की जमीन पशुओं के चरने के लिए आरक्षित है। इसी जमीन के 87 वर्गमीटर हिस्से पर ईदगाह बनाई गई थी। वहीं गाटा संख्या 1240 की जमीन खाद के गड्ढे के लिए दर्ज है, जिसके 187 वर्गमीटर हिस्से पर इमामबाड़ा बना दिया गया था। प्रशासन के मुताबिक, दोनों ही निर्माण अवैध थे।
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कार्रवाई के दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया। जुबैदा नाम की महिला ने कहा कि अगर जमीन सरकार की है तो सरकार सबकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन को कार्रवाई से पहले और समय देना चाहिए था। उनका कहना था कि यहां इमामबाड़े में गरीबों के कार्यक्रम होते थे और धार्मिक गतिविधियां भी होती थीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे पहले भी प्रशासन के पास गए थे, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। उनका आरोप है कि अगर थोड़ा समय और दिया जाता तो वे खुद समाधान निकाल सकते थे। कुछ बुजुर्गों ने यह भी कहा कि यह इमामबाड़ा कई सालों से बना हुआ था और उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि यह सरकारी जमीन पर है।
अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। नोटिस जारी करने के बाद भी कोई वैध दावा सामने नहीं आया, इसलिए सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया। प्रशासन ने साफ किया कि आगे भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।