UP के संभल में बुलडोजर कार्रवाई :बिछौली में ईदगाह और इमामबाड़ा ध्वस्त, देखते ही देखते ढहे ढांचे

यूपी के संभल जिले के बिछौली गांव में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सरकारी जमीन पर बने ईदगाह और इमामबाड़ा को बुलडोजर से गिरा दिया। कोर्ट के आदेश पर हुई इस कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा। स्थानीय लोगों ने विरोध जताया, जबकि प्रशासन ने इसे अवैध कब्जा हटाने की कानूनी प्रक्रिया बताया।
बिछौली में ईदगाह और इमामबाड़ा ध्वस्त, देखते ही देखते ढहे ढांचे
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    उत्तर प्रदेश के संभल जिले का बिछौली गांव एक बार फिर सुर्खियों में है। गुरुवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सरकारी जमीन पर बने ईदगाह और इमामबाड़ा को बुलडोजर से गिरा दिया। इस दौरान पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा और माहौल तनावपूर्ण बना रहा।

    सुबह-सुबह पहुंचा प्रशासन

    सुबह करीब 9 बजे प्रशासनिक टीम चार बुलडोजरों के साथ गांव पहुंची। एसडीएम निधि पटेल की मौजूदगी में अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। बुलडोजरों ने ईदगाह और इमामबाड़ा के ढांचे को गिराना शुरू कर दिया। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए।

    भारी सुरक्षा के बीच चला बुलडोजर

    स्थिति को देखते हुए पूरे इलाके को पुलिस छावनी में बदल दिया गया था। आरआरएफ के साथ भारी पुलिस बल तैनात रहा। जिला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई भी मौके पर पहुंचे और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कोर्ट के आदेश के तहत की गई है।

    Twitter Post

    कोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई

    तहसीलदार न्यायालय ने जनवरी में इस जमीन को खाली कराने का आदेश दिया था। इसके बाद प्रशासन ने पहले से तैयारी शुरू कर दी थी और लेखपालों की टीम गठित की गई थी। 31 जनवरी को सार्वजनिक नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन तय समय में किसी ने स्वामित्व का दावा नहीं किया।

    सरकारी जमीन पर था अवैध कब्जा

    राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, गाटा संख्या 1242 की जमीन पशुओं के चरने के लिए आरक्षित है। इसी जमीन के 87 वर्गमीटर हिस्से पर ईदगाह बनाई गई थी। वहीं गाटा संख्या 1240 की जमीन खाद के गड्ढे के लिए दर्ज है, जिसके 187 वर्गमीटर हिस्से पर इमामबाड़ा बना दिया गया था। प्रशासन के मुताबिक, दोनों ही निर्माण अवैध थे।

    ये भी पढ़ें: UP नहीं संभल रहा तो गद्दी छोड़िए... अखिलेश का CM योगी पर तीखा हमला, नोएडा मजदूर आंदोलन पर घमासान

    स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी

    कार्रवाई के दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया। जुबैदा नाम की महिला ने कहा कि अगर जमीन सरकार की है तो सरकार सबकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन को कार्रवाई से पहले और समय देना चाहिए था। उनका कहना था कि यहां इमामबाड़े में गरीबों के कार्यक्रम होते थे और धार्मिक गतिविधियां भी होती थीं।

    ‘दो दिन का समय तो देते’

    स्थानीय लोगों का कहना है कि वे पहले भी प्रशासन के पास गए थे, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। उनका आरोप है कि अगर थोड़ा समय और दिया जाता तो वे खुद समाधान निकाल सकते थे। कुछ बुजुर्गों ने यह भी कहा कि यह इमामबाड़ा कई सालों से बना हुआ था और उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि यह सरकारी जमीन पर है।

    प्रशासन का पक्ष

    अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। नोटिस जारी करने के बाद भी कोई वैध दावा सामने नहीं आया, इसलिए सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया। प्रशासन ने साफ किया कि आगे भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

    Latest Posts