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उमरिया में 4 दिन चला ऑपरेशन :जंगली हाथी E-5 को खितौली रेंज में छोड़ा गया, अब सैटेलाइट कॉलर से होगी निगरानी

उमरिया और शहडोल में दहशत फैला रहे जंगली हाथी E-5 को 4 दिन के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की खितौली रेंज में सुरक्षित छोड़ा गया। वन विभाग ने हाथी पर सैटेलाइट कॉलर लगाकर उसकी निगरानी शुरू कर दी है।
जंगली हाथी E-5 को खितौली रेंज में छोड़ा गया, अब सैटेलाइट कॉलर से होगी निगरानी
हाथी E-5 को 4 दिन के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की खितौली रेंज में सुरक्षित छोड़ा गया

मध्यप्रदेश के उमरिया और शहडोल इलाके में पिछले कई दिनों से लोगों के लिए डर का कारण बना जंगली हाथी ई-5 अब सुरक्षित तरीके से जंगल पहुंचा दिया गया है। यह हाथी दक्षिण शहडोल वन मंडल के आबादी वाले इलाकों के आसपास घूम रहा था, जिससे गांव के लोग काफी परेशान और डरे हुए थे। शनिवार को वन विभाग की टीम ने हाथी को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की खितौली रेंज में सुरक्षित छोड़ दिया। वन विभाग की टीम ने करीब चार दिन तक लगातार मेहनत कर हाथी को रेस्क्यू किया। इसके बाद विशेषज्ञों की निगरानी में उसे फिर से जंगल में छोड़ दिया गया। जानकारी के अनुसार, हाथी केशवाही रेंज के पास कई गांवों तक पहुंच गया था।

इसकी वजह से ग्रामीणों में डर का माहौल था। लोग खेतों और जंगल की तरफ जाने से बच रहे थे। हाथी लगातार अपनी जगह बदल रहा था, इसलिए वन विभाग की टीम उसकी हर गतिविधि पर नजर रख रही थी। हालात को देखते हुए विभाग ने बड़ा अभियान चलाया और आखिरकार हाथी को सुरक्षित पकड़कर जंगल में पहुंचा दिया।

60 से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों ने संभाला मोर्चा

हाथी ई-5 को सुरक्षित पकड़ने और जंगल तक पहुंचाने के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम और दक्षिण शहडोल वन मंडल के वन अमले ने संयुक्त रूप से काम किया। इस पूरे अभियान में 60 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे। टीम में वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी, उप संचालक, एसडीओ ताला, पनपथा और मानपुर के अधिकारी भी मौजूद रहे। इसके अलावा जबलपुर से वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम को भी बुलाया गया था। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हाथी को पकड़ना आसान नहीं था क्योंकि वह लगातार अपना स्थान बदल रहा था। कई बार टीम को रातभर जंगल में निगरानी करनी पड़ी।  चार दिनों की मेहनत के बाद हाथी को सुरक्षित नियंत्रित किया गया और फिर उसे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के खितौली क्षेत्र में छोड़ा गया।

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स्वास्थ्य परीक्षण के बाद जंगल में छोड़ा गया हाथी

रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद विशेषज्ञों ने हाथी ई-5 का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया। डॉक्टरों ने उसकी शारीरिक स्थिति की जांच की और यह सुनिश्चित किया कि वह पूरी तरह स्वस्थ है। स्वास्थ्य सामान्य पाए जाने के बाद ही उसे जंगल में छोड़ा गया। वन विभाग का कहना है कि जंगली हाथियों को पकड़कर दूसरे क्षेत्र में छोड़ने के दौरान उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति पर खास ध्यान दिया जाता है ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। इसी वजह से इस पूरे ऑपरेशन को बेहद सावधानी और विशेषज्ञों की निगरानी में अंजाम दिया गया।

सैटेलाइट कॉलर से होगी हर गतिविधि की निगरानी

इस बार वन विभाग ने हाथी ई-5 पर सैटेलाइट कॉलर भी लगाया है। इसकी मदद से हाथी की लोकेशन और गतिविधियों पर रियल टाइम निगरानी रखी जा सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे भविष्य में मानव और हाथी के बीच होने वाले संघर्ष को कम करने में काफी मदद मिलेगी। सैटेलाइट ट्रैकिंग के जरिए वन विभाग को यह जानकारी मिलती रहेगी कि हाथी किस दिशा में जा रहा है और कहीं वह दोबारा आबादी वाले इलाके की तरफ तो नहीं बढ़ रहा। जरूरत पड़ने पर पहले से ही गांवों को अलर्ट किया जा सकेगा।

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क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने क्या कहा

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने इस पूरे अभियान को वन्यजीव संरक्षण की दिशा में अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाला प्रयास है। हाथी ई-5 को सुरक्षित जंगल में वापस भेजकर हमने न सिर्फ मानव-हाथी संघर्ष को कम करने की कोशिश की है, बल्कि उसके प्राकृतिक व्यवहार और स्वास्थ्य की निगरानी की व्यवस्था भी की है। उन्होंने आगे कहा कि यह अभियान टीमवर्क और विशेषज्ञता का बेहतरीन उदाहरण है। सभी विभागों ने मिलकर समन्वय के साथ काम किया, जिसकी वजह से ऑपरेशन सफल हो पाया।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...

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