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अंतरिक्ष में कचरा बना समस्या, पृथ्वी की भीड़भाड़ वाली कक्षा साफ करेगा UK का रोबोटिक पंजे वाला अनोखा यान, 2029 में लॉन्च होगा पहला मिशन

UK का UK ADR मिशन, ClearSpace UK और UK Space Agency का जॉइंट प्रोजेक्ट, दो बेकार सैटेलाइट को पकड़कर वायुमंडल में जलाएगा। रोबोटिक पंजे वाला स्पेसक्राफ्ट कर लेगा 2032 तक मिशन पूरा। सस्टेनेबल स्पेस का बड़ा कदम, जनता सुझा सकती है नाम।  
  अंतरिक्ष में कचरा बना समस्या, पृथ्वी की भीड़भाड़ वाली कक्षा साफ करेगा UK का रोबोटिक पंजे वाला अनोखा यान, 2029 में लॉन्च होगा पहला मिशन
रिप्रेजेंटेटिव इमेज।

लंदन। अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट का मलबा पृथ्वी की कक्षा के लिए एक बहुत बड़ी समस्या बन गया है। पृथ्वी की कक्षा अब काफी भीड़भाड़ वाली हो गई है, खासकर उन बेकार हो चुके सैटेलाइट्स की वजह से जो लगातार पृथ्वी के चक्कर लगा रहे हैं। स्मिथसोनियन मैगजीन के अनुसार, यूनाइटेड किंगडम पृथ्वी की कक्षा को साफ करने के लिए एक मिशन की तैयारी कर रहा है। वे एक यूनीक स्पेसक्राफ्ट के जरिए सैटेलाइट मलबे की बढ़ती समस्या से निपटने की प्लानिंग कर रहे हैं, जिसमें बड़े रोबोटिक पंजे लगे होंगे। इस स्पेसक्राफ्ट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये दो बेकार हो चुके सैटेलाइट्स को पकड़ सके और उन्हें पृथ्वी के वायुमंडल में वापस लाकर जला सके। 

अपनी तरह का पहला क्लीनिंग मिशन

इस मिशन को साल 2029 में लॉन्च किया जाएगा। आम लोग भी इस मिशन का नाम सुझाने में मदद कर सकते हैं। क्लियरस्पेस यूके के मैनेजिंग डायरेक्टर रॉब एटचिसन ने कहा- हमारा अगला कदम एक ऐसा स्पेसक्राफ्ट डिजाइन करना, बनाना और उसका टेस्ट करना है जो किसी ऐसी चीज के करीब जा सकें जिसे कभी पकड़े जाने के लिए नहीं बनाया गया था और उस पर कंट्रोल पा सके। हम यूके सप्लाई चेन के अपने पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि 2029 में इसे लॉन्च किया जा सके।

यूके स्पेस एजेंसी और क्लियरस्पेस यूके ने तैयार किया मिशन

यूके एक्टिव डेब्री रिमूवल प्रोग्राम नाम का ये मिशन, यूके स्पेस एजेंसी और क्लियरस्पेस यूके द्वारा मिलकर तैयार किया गया है। ये प्रोजेक्ट दिखाएगा कि कैसे स्पेशली डिजाइन किए गए रोबोटिक इक्विपमेंट्स की हेल्प से स्पेस की ऑर्बिट में मौजूद ऑब्जेक्ट्स को वहां हमेशा के लिए छोड़ने के बजाय हटाया जा सकता है। इसके अलावा उम्मीद है कि ये स्पेसक्राफ्ट 2032 तक अपना मिशन पूरा कर लेगा। ये स्पेस ऑपरेशंस को और ज्यादा सस्टेनेबल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

रोबोटिक पंजे डेड सैटेलाइट्स को कैसे पकड़ेंगे

उपकरण या लोगों को ले जाने के लिए डिजाइन किए गए नॉर्मल स्पेसक्राफ्ट के उलट, इस प्रपोज्ड यान को ऐसी चीजों के पास जाना होगा जिन्हें कभी पकड़े जाने के लिए नहीं बनाया गया था। इसके रोबोटिक पंजों का काम ऐसे सैटेलाइट्स को पकड़ना है जो स्पेस में घूम रहे हों या डगमगा रहे हों। इससे ये काम किसी चीज को बस हाथ बढ़ाकर पकड़ने की तुलना में कहीं ज्यादा जटिल हो जाता है। सैटेलाइट्स को पकड़ने की कोशिश करने से पहले, स्पेसक्राफ्ट को उनकी स्पीड के साथ तालमेल बिठाना होगा। इसके लिए बहुत सावधानी से यान को कंट्रोल करने और सटीक नेविगेशन की जरूरत होती है। इससे वो सैटेलाइट्स के काफी करीब पहुंच सकेगा और कोई और इसका भी ध्यान रखना होगा कि टक्कर न हो जाए। एक बार पकड़ लेने के बाद, स्पेसक्राफ्ट उन्हें लोअर ऑर्बिट की ओर ले जाएगा। वहां पृथ्वी का वायुमंडल उनकी स्पीड को धीमी कर देगा और इतनी हीट पैदा करेगा कि वे वायुमंडल में दोबारा एंट्री करते समय टूटकर नष्ट हो जाएंगे।

ऐसा स्पेसक्राफ्ट यूज होगा जिसमें दोबारा फ्यूल भरा जा सके

ये टेक्नोलॉजी क्लियरस्पेस यूके द्वारा डेवलप की जा रही है। ये स्पेसक्राफ्ट ऑपरेशंस में एक्सपर्टीज रखने वाली एक कंपनी की ब्रिटिश ब्रांच है, जो स्पेस में कई तरह की सर्विसेज प्रोवाइड करती है। इस मिशन में एक ऐसा स्पेसक्राफ्ट यूज होगा जिसमें दोबारा फ्यूल भरा जा सकता है। इसे भविष्य में भी इस्तेमाल करने के हिसाब से डिजाइन किया गया है। इससे ऐसे स्पेसक्राफ्ट्स का रास्ता खुल सकता है, जो एक बार काम करने के बाद बेकार होने के बजाय स्पेस में आगे भी अन्य काम कर सकें।

अंतरिक्ष के कचरे को हटाना क्यों जरूरी है

सैटेलाइट हमारे रोजमर्रा के लाइफ का एक अहम हिस्सा बन गए हैं। हम अक्सर जिन सुविधाओं का इस्तेमाल करते हैं, वे इन्हीं पर डिपेंड हैं। GPS नेविगेशन, मौसम का पूर्वानुमान, कम्युनिकेशन और कई अन्य सिस्टम पृथ्वी के ऊपर काम कर रहे इन्हीं उपकरणों पर टिके हैं। हालांकि जब सैटेलाइट काम करना बंद कर देते हैं, तब भी वे स्पेस की कक्षा में ही बने रहते हैं और अन्य स्पेसक्राफ्ट्स के लिए खतरा बन सकते हैं।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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