ईरान पर हमले से पहले पेंटागन में बड़ा फेरबदल, रणनीति और योजना के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल ब्रेट सिल्विया पद से हटे, ट्रंप प्रशासन पर उठे सवाल

वॉशिंगटन। पेंटागन के सैन्य रणनीति और प्लानिंग के लिए जिम्मेदार सीनियर ऑफिसर को उनके पद से हटा दिया गया है। ऐसे समय में जब ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ जंग में अपने अगले कदम पर विचार कर रहा है, इस बदलाव ने अमेरिकी रक्षा विभाग में लीडरशिप चेंज को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ये घटनाक्रम रीजनल सिक्योरिटी के लिहाज से एक बेहद नाजुक मोड़ पर हुआ है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को एक अमेरिकी डिफेंस ऑफिसर ने आर्मी के लेफ्टिनेंट जनरल ब्रेट सिल्विया के पद से हटने की पुष्टि की। सिल्विया रणनीति, प्लानिंग और पॉलिसी डायरेक्टोरेट के प्रमुख थे, जिसे आर्मी में J5 के नाम से जाना जाता है। ये डायरेक्टोरेट जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन और राष्ट्रपति के साथ मिलकर मिलिट्री प्लान्स के कोऑर्डिनेशन में मदद करता है।
हटाने का कारण नहीं बताया
मामले की संवेदनशीलता और स्टाफ से जुड़े पहलुओं को देखते हुए, नाम न बताने की शर्त पर एक ऑफिसर ने बताया कि सिल्विया को हटाए जाने का कोई कारण नहीं बताया गया है। इतना ही नहीं अभी तक उनके उत्तराधिकारी के तौर पर किसी का नाम तय किया गया है या नहीं इसकी भी जानकारी नहीं है। ये बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन के बाद ईरान पर फिर से अटैक करने पर विचार कर रहे हैं।
अमेरिका ने अपने सहयोगियों को अलर्ट किया
इन चेतावनियों की जानकारी रखने वाले दो डिप्लोमैट्स के अनुसार, वॉशिंगटन ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों को अलर्ट कर दिया है कि वे संभावित मिलिट्री एक्शन और ईरान की ओर से जवाबी हमले के रिस्क के लिए तैयार रहें। ट्रंप ने अभी तक आगे के अटैक को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। हालांकि, इन चेतावनियों ने क्षेत्रीय सरकारों के बीच चिंता बढ़ा दी है कि अगर दोनों पक्षों के बीच तनाव और बढ़ता है, तो एनर्जी इंस्टॉलेशंस और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर अटैक हो सकते हैं।
सैन्य ऑपरेशन में रहती है अहम भूमिका
सैन्य उद्देश्यों को ऑपरेशनल प्लान्स में बदलने में J5 की मेन भूमिका होती है। पेंटागन ने हाल ही में फारस की खाड़ी की ओर USS थियोडोर रूजवेल्ट एयरक्राफ्ट कैरियर और मरीन सैनिकों को ले जाने वाले एम्फीबियस जहाजों को भेजा है। इस तैनाती में करीब 9,000 सैनिक शामिल हैं। इन एडिशनल फोर्सेज से अमेरिका के पास मिलिट्री ऑप्शंस बढ़ सकते हैं, हालांकि इनकी मौजूदगी से ये तय नहीं होता कि ट्रंप कोई और हमला करने की मंजूरी देंगे या नहीं। न ही ये पता चलता है कि ऐसा हमला कब होगा।
पलटवार हो सकता है अमेरिकी हमले के बाद
क्षेत्रीय सरकारों का मानना है कि अमेरिका की ओर से कोई नया मिलिट्री ऑपरेशन शुरू होने पर रिटालिएशन (पलटवार) हो सकती है, जो अमेरिकी हमले के शुरुआती दौर के बाद भी जारी रह सकती है। डिप्लोमैट्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि मिलिट्री एक्शन का एक नया दौर कई दिनों तक चल सकता है। वहीं, ईरान की जवाबी कार्रवाई और उसके सहयोगी समूहों के कदमों से ये टकराव और लंबा खिंच सकता है।
फिलहाल बातचीत को बढ़ा रहा है ईरान
इस बीच, ईरान ने बातचीत में इंटरेस्ट दिखाना जारी रखा है। विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि तेहरान "डिप्लोमेसी को सफल होने का मौका दे रहा है।" वे मध्यस्थों के साथ मिलकर उन प्रस्तावों की समीक्षा कर रहे हैं, जिनका इस्तेमाल सीजफायर को फिर से बहाल करने के आधार के तौर पर किया जा सकता है। ट्रंप पहले ही इस प्रपोजल को रिजेक्ट कर चुके थे। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी सभी पक्षों से टेंशन न बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को समझदारी दिखानी चाहिए और टेंशन को कम करने के लिए राजनीतिक समाधान खोजने चाहिए।
ट्रंप ने सैन्य विकल्प खुला रखा है
ट्रंप कभी कहते हैं कि ये टकराव जल्द खत्म हो सकता है, तो कभी चेतावनी देते हैं कि और बमबारी भी हो सकती है। इस हफ्ते की शुरुआत में टेक्सास में एक चुनावी आयोजन के दौरान उन्होंने कहा कि अगर आप चाहें, तो ये जंग कुछ ही हफ्तों में खत्म हो सकती है। ट्रंप ने बताया कि किसी ने मुझसे पूछा था कि ईरान में जंग कब खत्म होगी, मैंने कहा, जब मैं चाहूंगा, तब खत्म हो जाएगी।




















