नाग पंचमी पर 40 साल बाद सावन सोमवार का दुर्लभ संयोग, जानें तवे से लेकर खुदाई तक क्यों वर्जित माने गए हैं ये काम

सीहोर। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना और नाग देवता की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस बार 17 अगस्त को नाग पंचमी का पर्व सावन सोमवार के दिन पड़ने से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। स्वर्ण पदक विजेता ज्योतिष पदम भूषण ज्योतिषाचार्य पंडित गणेश शर्मा के अनुसार, लंबे अंतराल के बाद बने इस संयोग को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जा रहा है। मान्यता है कि नाग पंचमी पर श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से नाग देवता की कृपा प्राप्त होती है।
नाग पंचमी पर तवा चढ़ाने की परंपरा क्यों नहीं?
पंडित गणेश शर्मा बताते हैं कि नाग पंचमी के दिन घर की रसोई में तवा चढ़ाकर रोटी बनाने की परंपरा कई क्षेत्रों में वर्जित मानी जाती है। लोक मान्यताओं में तवे की आकृति को नाग के फण से जोड़ा जाता है। इसलिए इस दिन गर्म तवे पर रोटी सेंकने से बचने की परंपरा चली आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी नाग देवताओं के पूजन और उनकी तृप्ति का दिन है, इसलिए उनके प्रतीक माने जाने वाले तवे को अग्नि पर रखने से परहेज किया जाता है।
राहु-केतु और मानसिक अशांति से जोड़ी जाती है मान्यता
ज्योतिषाचार्य पंडित शर्मा के मत के अनुसार नाग पंचमी के दिन तवे पर रोटी बनाने से बचने की परंपरा को राहु-केतु और मानसिक अशांति जैसी ज्योतिषीय मान्यताओं से भी जोड़ा जाता है। हालांकि ये धार्मिक और लोक मान्यताएं हैं, वैज्ञानिक नियम नहीं। इस दिन कई परिवारों में रोटी के स्थान पर पूरी, हलवा अथवा अन्य ऐसे पकवान बनाए जाते हैं, जिन्हें तवे पर सेंकने की आवश्यकता नहीं होती।
जमीन की खुदाई से भी बचने की परंपरा
नाग पंचमी पर जमीन की खुदाई नहीं करने की मान्यता भी प्राचीन परंपराओं में शामिल है। धार्मिक विश्वास के अनुसार मिट्टी और पाताल लोक में नागों का वास माना गया है। ऐसे में जमीन खोदने से नागों को नुकसान पहुंचने की आशंका की कल्पना की गई है। इसी वजह से इस दिन अनावश्यक रूप से खुदाई करने से बचने की सलाह दी जाती है। यह मान्यता प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता का संदेश भी देती है।
सुई, चाकू और धारदार वस्तुओं से दूरी
पंडित शर्मा के अनुसार नाग पंचमी के दिन सुई-धागे के इस्तेमाल और धारदार वस्तुओं के प्रयोग से भी बचने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार इस दिन चाकू से सब्जी काटने या नुकीली वस्तुओं का प्रयोग करने से परहेज करना चाहिए। इन परंपराओं का उद्देश्य पर्व के दिन संयम, शांति और अहिंसा की भावना को बनाए रखना भी माना जाता है।
सात्विक भोजन और शांत मन का संदेश
नाग पंचमी के दिन तामसिक भोजन से दूर रहकर सात्विक भोजन ग्रहण करने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही क्रोध, विवाद और किसी के प्रति गलत विचार रखने से बचने की बात कही गई है। पंडित शर्मा का कहना है कि पर्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि मन, वाणी और व्यवहार में भी शुद्धता लाने का अवसर होना चाहिए।
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शिव आराधना के साथ नाग देवता का पूजन
इस बार नाग पंचमी और सावन सोमवार का संयोग होने से भगवान शिव तथा नाग देवता की आराधना का महत्व श्रद्धालुओं के लिए और बढ़ गया है। सावन सोमवार को शिवालयों में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के साथ नाग पंचमी पर नाग देवता के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाएगी। धार्मिक मान्यताओं में नाग देवता को भगवान शिव के आभूषण और संरक्षण से जोड़ा जाता है। ऐसे में यह पर्व शिवभक्तों के लिए श्रद्धा, संयम और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश लेकर आया है।












