देशभर में होली का पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, लेकिन इसकी शुरुआत सबसे पहले उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से होती है। परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी भगवान महाकाल को प्रतीकात्मक रूप से एक किलो हर्बल गुलाल अर्पित किया जाएगा। संध्या आरती के दौरान पुजारी भगवान को गुलाल चढ़ाएंगे, जिसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंदिर परिसर में गोबर के उपलों से बनी होलिका का दहन किया जाएगा।
मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से इस बार भी आम श्रद्धालुओं को होलिका दहन स्थल के पास जाने की अनुमति नहीं दी है। पहले हुई आग की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। होलिका दहन के समय संभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे और पूरे कार्यक्रम की निगरानी की जाएगी।
महाकाल मंदिर में धुलेंडी का पर्व मंगलवार को मनाया जाएगा। तड़के सुबह 4 बजे होने वाली भस्म आरती में सबसे पहले भगवान महाकाल को गुलाल लगाया जाएगा। इसके बाद भगवान का भांग और चंदन से विशेष शृंगार किया जाएगा।
मंदिर के पुजारी आशीष शर्मा के अनुसार, महाकाल मंदिर में सबसे पहले होली मनाने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है, जिसमें भगवान को प्रतीकात्मक रूप से गुलाल अर्पित किया जाता है।
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महाकाल मंदिर में साल में दो बार भगवान की दिनचर्या और आरती के समय में बदलाव किया जाता है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से ठंड के अनुसार आरती का समय तय होता है, जबकि चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से गर्मी के अनुसार समय निर्धारित किया जाता है।
भस्म आरतीः प्रातः 04:00 से 06:00 बजे तक
दद्योदक आरतीः प्रातः 07:00 से 07:45 बजे तक
भोग आरतीः प्रातः 10:00 से 10:45 बजे तक
संध्या पूजनः सायं 05:00 से 05:45 बजे तक
संध्या आरतीः सायं 07:00 से 07:45 बजे तक
शयन आरतीः रात्रि 10:30 से 11:00 बजे तक
इस वर्ष 3 मार्च (होली के दूसरे दिन) से भगवान महाकाल की दिनचर्या में बदलाव होगा। इस दिन से भगवान को ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा और यह क्रम शरद पूर्णिमा तक जारी रहेगा। इसके साथ ही प्रतिदिन होने वाली पांच आरतियों में से तीन आरतियों के समय में भी बदलाव किया जाएगा।
ग्रहण के सूतक काल के दौरान मंदिर के पट खुले रहेंगे, लेकिन भगवान को नियमित भोग नहीं लगाया जाएगा। इस दौरान केवल शक्कर का भोग अर्पित किया जाएगा। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर की शुद्धि कर विधि-विधान से पूजा और आरती की जाएगी।
होली के दौरान मंदिर प्रशासन ने कुछ नियम लागू किए हैं, जिनका पालन सभी श्रद्धालुओं को करना होगा। मंदिर परिसर में रंग या गुलाल लाने की अनुमति नहीं होगी। पुजारी, कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी भी रंग लेकर प्रवेश नहीं करेंगे। सभी प्रवेश द्वारों पर कड़ी जांच की जाएगी। पूरे मंदिर परिसर की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से की जाएगी। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि होली का पर्व मंदिर की गरिमा के अनुरूप शांति, श्रद्धा और सौहार्द के साथ मनाएं।