Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

रंग में भंग :होलिका दहन के एक दिन बाद चंद्र ग्रहण इसलिए दूसरे दिन नहीं खेल सकेंगे होली, करना होगा इंतजार!

इस बार होलिका दहन के 1 दिन बाद होली खेली जाएगी। इसकी वजह यह है कि 3 मार्च को चंद्र ग्रहण है। होली पर भद्रा और चंद्र ग्रहण का साया होने से ज्योतिषाचार्यों का मत है कि इस संयोग में रंग नहीं खेले जा सकते।
होलिका दहन के एक दिन बाद चंद्र ग्रहण इसलिए दूसरे दिन नहीं खेल सकेंगे होली, करना होगा इंतजार!
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। इस वर्ष होली पर्व पर भद्रा और खग्रास चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसके कारण पर्व की तिथियों को लेकर लोगों में असमजंस की स्थिति बनी हुई है। पाचांग के अनुसार 2 मार्च को होलिका दहन के समय भद्रा का साया रहेगा, जबकि 3 मार्च को धुलेंडी के दिन खग्रास चंद्र ग्रहण पड़ रहा है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस स्थिति में परपंरागत रूप से होली मनाने के नियमों में बदलाव करना होगा। भद्रा काल में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। ऐसे में 2 मार्च को सूर्यास्त के समय होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत नहीं होगा। वहीं 3 मार्च को लगने वाले खग्रास चंद्र ग्रहण के कारण ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा।

    सूतक काल में शुभ कार्य वर्जित 

    सूतक काल में मंदिर दर्शन, पूजा पाठ और सभी कार्यों पर रोक मानी जाती है। इसी कारण शास्त्रों के अनुसार 3 मार्च को होली खेलना उचित नहीं माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जो लोग 2 मार्च को भद्रा के कारण होलिका दहन नहीं कर पाएंगे, वे 3 मार्च को भद्रा समाप्त होने के बाद और सूर्योदय से पहले, यानि सुबह 5.24 बजे से 6.30 बजे के बीच होलिका दहन कर सकते हैं। यह समय सीमित जरूर है, लेकिन शास्त्रों के अनुरुप माना गया है। यदि कोई इन दोनों समयों में भी होलिका दहन न कर सकें, तो ग्रहण समाप्त होने के बाद भी दहन किया जा सकता है।

    पुच्छकाल में दहन संभव

    पंडित ज्योतिषाचार्य जगदीश शर्मा ने बताया कि इस वर्ष होली का मुख्य उत्सव 4 मार्च को मनाए जाएगा। पंडित विष्णु राजौरिया के अनुसार भद्रा और चंद्र ग्रहण होने की स्थिति में दो हल हैं, पहला 2 मार्च की रात भद्रा के पुच्छकाल में रात 1.25 से 3.37 के बीच होलिका दहन किया जाए। भद्रा के पुच्छकाल में होलिका दहन संभव है। इस दौरान जो होलिका दहन न कर पाएं, वे भद्र समाप्त होने के बाद व सूर्योददय से पहले यानी 3 मार्च को सुबह 5.24 से 6.35 के बीच होलिका दहन करें। इन दोनों में दहन न कर सकें, तो 3 मार्च को ग्रहण खत्म होने पर 6.47 के बाद करें। वैसे ये शास्त्रसम्मत नहीं होगा, पर होली लोकपर्व है, अत: कम दोषपूर्ण है। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

    Latest Posts