ठाकरे ब्रदर्स के मिलाप पर एक्सपर्ट्स ने ठाकरे ब्रदर्स की संभावित एकजुटता महायुति (BJP–शिवसेना) के लिए सीधी और गंभीर चुनौती बनकर उभर सकती है। यदि यह गठबंधन जमीन पर उतरता है, तो बिखरे हुए विपक्षी मतों को एकजुट कर एक मजबूत ध्रुव तैयार करने की क्षमता रखता है। इसका सीधा असर यह होगा कि चुनाव का पूरा विमर्श स्थानीय मुद्दों बनाम सत्ताधारी गठबंधन के नैरेटिव में तब्दील हो सकता है।
दरअसल, बीएमसी चुनाव अब महज एक नगर निकाय का चुनाव नहीं रह गया है। यह चुनाव मुंबई की राजनीतिक दिशा, सत्ता संतुलन और भविष्य की रणनीति तय करने वाली लड़ाई बन चुका है। यही वजह है कि सभी प्रमुख दल इसे प्रतिष्ठा की लड़ाई के तौर पर देख रहे हैं।
ठाकरे ब्रदर्स की ओर से मिल रहे संकेत साफ बताते हैं कि वे इस चुनाव को हल्के में लेने के मूड में नहीं हैं। संयुक्त घोषणापत्र, साझा रैलियां और रोड शो जैसी तैयारियां यह दर्शाती हैं कि विपक्ष पूरी रणनीतिक मजबूती के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर चुका है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह साझेदारी जमीनी स्तर पर प्रभावी रहती है, तो मुंबई की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में बीएमसी चुनाव केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित न रहकर राज्य और राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी बेहद अहम साबित हो सकता है।



















