BMC Election :उद्धव- राज ठाकरे का BMC चुनाव को लेकर बड़ा गेम प्लान, आज से शुरू हो रही चुनावी सभाओं में दिखाएंगे दमखम

मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का हाल ही में 20 साले बाद एक बार फिर गठबंधन हुआ है। जिसके बाद अब दोनों नेता इस साल के BMC चुनाव में एक साथ उतरेंगे। चुनाव के लिए वोटिंग 15 जनवरी को होगी। वहीं आज से ये गठबंधन अपनी दावेदारी मजबूत करने चुनावी मैदान में उतरेगा।
ठाकरे ब्रदर्स की 8 सभाएं होगी
आर्थिक राजधानी मुंबई के BMC चुनाव के मद्देनजर ठाकरे ब्रदर्स संयुक्त रूप से रैलियां करने जा रहे हैं। इसकी शुरुआत आज से होगी। वहीं इस चुनाव के लिए गठबंधन कुल 8 रैलियां करेगी। इनमें तीन रैली मुंबई में, कल्याण डोंबीवली में दो इसके अलावा ठाणे, नासिक और मीरा-भायंदर में एक-एक रैली आयोजित की जाएगी।
घोषणा पत्र तैयार करने में जुटी पार्टी
BMC चुनाव को देखते हुए मनसे और शिवसेना (UBT) ने साथ मिलकर घोषणा पत्र तैयार करने पर सहमति जताई है। दोनों दलों की तरफ से इस पर काम करना शुरू हो चुका है। शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने जानकारी दी कि उद्धव ठाकरे के पुत्र और महाराष्ट्र सरकार में पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे सहित राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे मिलकर संयुक्त रूप से मैनिफेस्टो को अंतिम रूप देने में लगे हैं।
विशेषज्ञ बोले- महायुति का बढ़ेगा सिरदर्द
ठाकरे ब्रदर्स के मिलाप पर एक्सपर्ट्स ने ठाकरे ब्रदर्स की संभावित एकजुटता महायुति (BJP–शिवसेना) के लिए सीधी और गंभीर चुनौती बनकर उभर सकती है। यदि यह गठबंधन जमीन पर उतरता है, तो बिखरे हुए विपक्षी मतों को एकजुट कर एक मजबूत ध्रुव तैयार करने की क्षमता रखता है। इसका सीधा असर यह होगा कि चुनाव का पूरा विमर्श स्थानीय मुद्दों बनाम सत्ताधारी गठबंधन के नैरेटिव में तब्दील हो सकता है।
दरअसल, बीएमसी चुनाव अब महज एक नगर निकाय का चुनाव नहीं रह गया है। यह चुनाव मुंबई की राजनीतिक दिशा, सत्ता संतुलन और भविष्य की रणनीति तय करने वाली लड़ाई बन चुका है। यही वजह है कि सभी प्रमुख दल इसे प्रतिष्ठा की लड़ाई के तौर पर देख रहे हैं।
ठाकरे ब्रदर्स की ओर से मिल रहे संकेत साफ बताते हैं कि वे इस चुनाव को हल्के में लेने के मूड में नहीं हैं। संयुक्त घोषणापत्र, साझा रैलियां और रोड शो जैसी तैयारियां यह दर्शाती हैं कि विपक्ष पूरी रणनीतिक मजबूती के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर चुका है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह साझेदारी जमीनी स्तर पर प्रभावी रहती है, तो मुंबई की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में बीएमसी चुनाव केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित न रहकर राज्य और राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी बेहद अहम साबित हो सकता है।











