रायपुर। सुकमा में बुधवार को नक्सल विरोधी अभियान के तहत एक अहम सफलता दर्ज की गई। जिले में सक्रिय 26 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों में से 13 पर कुल 65 लाख रुपए का इनाम घोषित था। सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के मुताबिक सरेंडर करने वाले 26 नक्सलियों में सात महिलाएं भी थीं। सभी ने राज्य सरकार की ‘पुणे मार्गेम’योजना से प्रभावित होकर सामान्य जीवन अपनाने का निर्णय लिया।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि नक्सली राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से भी प्रभावित थे। इनमें कंपनी पार्टी कमेटी की सदस्य 35 वर्षीय लाली उर्फ मुचाकी आयते लखमू भी शामिल है, जिस पर 10 लाख रुपए का इनाम घोषित था। अधिकारियों के मुताबिक, लाली कई गंभीर हिंसक वारदातों में शामिल रही है। इनमें 2017 में ओडिशा के कोरापुट रोड पर किया गया आईईडी विस्फोट भी शामिल है, जिसमें 14 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे।
अधिकारी ने जानकारी दी कि हेमला लखमा साल 2020 में सुकमा के मिनपा इलाके में हुए हमले में शामिल थी, जिसमें 17 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। चार अन्य इनामी नक्सलियों ने भी डाला हथियार पुलिस ने बताया कि लाली और हेमला के अलावा आसमिता उर्फ कमलू सन्नी, रामबती उर्फ पदम जोगी और सुंदरम पाले ने भी आत्मसमर्पण किया है।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) बटालियन, दक्षिण बस्तर डिवीजन, माड डिवीजन और आंध्र-ओडिशा बॉर्डर डिवीजन जैसे माओवादी संगठनों में सक्रिय थे। इनके नाम छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़, सुकमा और ओडिशा से सटे इलाकों में हुई कई हिंसक घटनाओं से जुड़े रहे हैं।
एसपी किरण चव्हाण ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को तत्काल 50,000 रुपए की सहायता राशि दी गई है। इसके साथ ही राज्य सरकार की नीति के अनुसार उनका पुनर्वास भी किया जाएगा। चव्हाण ने बाकी माओवादी संगठनों से जुड़े लोगों से भी हिंसा का रास्ता छोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने वालों को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर जीवन उपलब्ध कराया जाएगा।