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MP School Education : स्कूल शिक्षा विभाग में ट्राइबल-एससी और श्रम विभाग के 21 हजार स्कूल मर्ज करने की तैयारी

प्रदेश सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए आदिवासी विकास विभाग और श्रम विभाग के अंतर्गत आने वाले करीब 21 हजार से अधिक स्कूलों को अब स्कूल शिक्षा विभाग में मर्ज करने की तैयारी कर ली है। इस निर्णय के बाद ट्राइबल स्कूलों का संचालन भी अब शिक्षा विभाग द्वारा ही किया जाएगा।
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स्कूल शिक्षा विभाग में ट्राइबल-एससी और श्रम विभाग के 21 हजार स्कूल मर्ज करने की तैयारी
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रामचन्द्र पाण्डेय, भोपाल। प्रदेश सरकार आदिवासी विभाग और श्रम विभाग के 21 हजार स्कूलों को स्कूल शिक्षा विभाग में मर्ज करने की तैयारी कर रही है।  मर्जर की कार्रवाई के बाद स्कूल शिक्षा विभाग के अधीनस्थ करीब 1.15 लाख स्कूल हो जाएंगे। मंत्रालय सूत्रों के अनुसार सरकार का मत है कि अलग-अलग विभागों द्वारा स्कूल संचालन की वर्तमान व्यवस्था में कई तरह की असमानताएं हैं। अलग नीतियां, अलग मॉनिटरिंग और अलग प्रशासनिक व्यवस्था के कारण शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। इस कारण अब सभी सरकारी स्कूलों को एक समान व्यवस्था के तहत लाना जरूरी है।

स्कूल शिक्षा विभाग के पास हो जाएंगे 1.15 लाख स्कूल 

जानकारी के अनुसार प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग पहले से करीब 92 हजार सरकारी स्कूल संचालित कर रहा है। इसके अलावा 145 मॉडल स्कूल और 274 सांदीपनि विद्यालय भी संचालित किए जा रहे हैं। दूसरी ओर जनजातीय कार्य विभाग के पास 21 हजार से अधिक स्कूल हैं। अनुसूचित जाति विभाग का प्रत्येक संभाग में एक-एक स्कूल संचालित है, जबकि श्रम विभाग के चार श्रमोदय आवासीय विद्यालय-भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में संचालित हो रहे हैं। इन सभी स्कूलों के मर्ज होने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित होने वाले स्कूलों की संख्या करीब 1.15 लाख तक पहुंच जाएगी।

जनजातीय स्कूलों की स्थिति पर विशेष फोकस 

राज्य सरकार का विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों के स्कूलों की दयनीय स्थिति को लेकर फोकस है। सरकार का मानना है कि जब सभी स्कूल एक ही विभाग के अंतर्गत आ जाएंगे, तब निगरानी बेहतर तरीके से हो सकेगी। अभी किताब वितरण, परीक्षा संचालन और शैक्षणिक गतिविधियों का बड़ा हिस्सा पहले से ही स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से संचालित होता है, लेकिन प्रशासनिक नियंत्रण अलग-अलग विभागों के पास है। इससे कई बार समन्वय नहीं हो पाता।

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शिवराज सरकार में ये योजना हो गई ​थी होल्ड 

इससे पूर्व तत्कालीन शिवराज सरकार के समय वर्ष 2014-15 में आदिम जाति कल्याण विभाग (अब जनजातीय कार्य विभाग) के स्कूलों को स्कूल शिक्षा विभाग में मर्ज करने की तैयारी की जा चुकी है, लेकिन तत्कालीन आदिम जाति कल्याण मंत्री ज्ञान सिंह ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। इस कारण यह प्रस्ताव होल्ड कर दिया गया था।

शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ने के साथ एकरूपता आएगी 

शिक्षा के संचालन के लिए जब अलग विभाग यानि स्कूल शिक्षा विभाग है, तो अलग-अलग विभागों के पास स्कूल होने से शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ न्याय नहीं हो पाता है। निश्चित ही एक विभाग के संचालन से शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी और बच्चों में एकरूपता आएगी।

राजीव शर्मा, शिक्षाविद

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अ​धिकारी प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं 

मुख्यमंत्री की मंशा है कि सभी स्कूलों का संचालन स्कूल शिक्षा विभाग के पास हो। इसको लेकर अधिकारी प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं। अभी इससे अधिक इस संबंध में कुछ कहना ठीक नहीं होगा।

उदयप्रताप सिंह, मंत्री, स्कूल शिक्षा विभाग

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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