Manisha Dhanwani
12 Jan 2026
वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार जगत में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने ऐलान किया है कि, ईरान के साथ कारोबार करने वाले किसी भी देश पर अमेरिका 25% टैरिफ लगाएगा, जो तत्काल प्रभाव से लागू होगा। इस फैसले का सीधा असर भारत, चीन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों पर पड़ सकता है। भारत के लिए चिंता इसलिए बढ़ गई है क्योंकि उस पर पहले से ही 50% अमेरिकी टैरिफ लागू है। ऐसे में कुल टैरिफ 75% तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट कर कहा कि, जो भी देश इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ व्यापार करेगा। उसे अमेरिका के साथ अपने सभी व्यापार पर 25% अतिरिक्त टैरिफ देना होगा। यह आदेश फाइनल है और तुरंत लागू होगा। हालांकि, अभी तक व्हाइट हाउस की ओर से आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान में सरकार और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन जारी हैं। ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) के मुताबिक, 17 दिनों में 600 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। अमेरिका पहले से ही ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए है। ट्रंप ने कहा कि, ईरान सरकार प्रदर्शन रोकने में रेड लाइन पार कर रही है और अमेरिका कड़े विकल्पों पर विचार कर रहा है।
भारत के लिए यह फैसला बेहद अहम है। अमेरिका पहले ही भारत पर 25% रेसिप्रोकल टैरिफ और 25% रूस से तेल आयात को लेकर पेनल्टी टैरिफ लगा चुका है। अगर ईरान व्यापार के कारण 25% और जुड़ता है, तो कुल टैरिफ 75% हो सकता है। इससे भारतीय निर्यात (खासतौर पर फार्मा, केमिकल्स, फूड प्रोडक्ट्स) पर दबाव बढ़ेगा। राहत की बात यह है कि, भारत ने 2019 से ईरान से कच्चे तेल का आयात बंद कर रखा है, लेकिन अन्य वस्तुओं का व्यापार जारी है।
वित्त वर्ष 2024-25 (अप्रैल-मार्च) में भारत-ईरान व्यापार का हाल-
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विवरण |
राशि (डॉलर में) |
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भारत का निर्यात |
1.24 अरब |
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भारत का आयात |
0.44 अरब |
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कुल व्यापार |
1.68 अरब |
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भारत का ट्रेड सरप्लस |
0.80 अरब |
भारत से ईरान को निर्यात: चावल, चाय, चीनी, दवाइयां, ऑर्गेनिक केमिकल्स, इलेक्ट्रिक मशीनरी, आर्टिफिशियल ज्वेलरी
ईरान से भारत आयात: सूखे मेवे, ऑर्गेनिक/इनऑर्गेनिक केमिकल्स, कांच के उत्पाद
मीडिया रिपोर्ट्स और वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जहां ईरान के कुल तेल निर्यात का करीब 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा चीन को जाता है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात, भारत, तुर्की, इराक और अफगानिस्तान भी ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं। अमेरिकी टैरिफ लागू होने की स्थिति में एशिया और खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक तनाव बढ़ सकता है और एक बार फिर ट्रेड वॉर जैसे हालात बन सकते हैं।
ईरान की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस पर निर्भर करती है। इसके अलावा पेट्रोकेमिकल्स, स्टील, तांबा और कृषि उत्पाद भी देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। वर्ष 2022 में ईरान का कुल व्यापार लगभग 140 अरब डॉलर रहा, जिसमें निर्यात 80.9 अरब डॉलर और आयात 58.7 अरब डॉलर था।
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हालात बिगड़ते देख ट्रंप प्रशासन ने ईरान में रह रहे अमेरिकी नागरिकों से तुरंत देश छोड़ने की अपील की है। वर्चुअल US एम्बेसी ने सुरक्षा अलर्ट जारी किया है और नागरिकों को चेताया गया है कि वे अपने निकलने की योजना में पूरी तरह सावधानी बरतें। अमेरिका और ईरान के बीच 1980 से कोई राजनयिक संबंध नहीं हैं, इसलिए ईरान में अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा के लिए वर्चुअल एम्बेसी का संचालन किया जा रहा है।
ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि, यदि उस पर हमला किया गया, तो ईरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजराइल को सीधे निशाना बनाएगा। संसद में ‘डेथ टू अमेरिका’ के नारे लगे और ईरानी नेतृत्व ने प्रदर्शनकारियों और विरोधी गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत भी दिए हैं।
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साल |
प्रमुख कदम |
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1979 |
ईरानी संपत्तियां फ्रीज, व्यापार प्रतिबंध |
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1995 |
तेल-गैस सेक्टर में अमेरिकी निवेश पर रोक |
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2006-10 |
परमाणु कार्यक्रम पर कड़े प्रतिबंध |
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2012 |
सेंट्रल बैंक पर बैन, SWIFT से बाहर |
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2015 |
JCPOA के बाद आंशिक राहत |
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2018 |
ट्रंप ने JCPOA छोड़ा, प्रतिबंध बहाल |
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2024 |
ईरान से कारोबार पर सख्ती |
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2025 |
25% टैरिफ का ऐलान |
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