Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

बेरोजगारी वाली होली: एक झटके में 40% कर्मचारियों की छंटनी, लाखों की सैलरी वाले हुए अनइंप्लॉयड!

होली का रंग इस बार एक बड़े स्टार्ट कंपनी के कर्मचारियों के लिए फीका पड़ गया। कंपनी ने होली से ठीक पहले करीब 40 प्रतिशत लोगों की छंटनी कर दी। इस लेऑफ का शिकार कई बड़े पैकेज वाले लोग भी हो गए। ऐसे में होली कई लोगों के लिए इस साल बेरंग रह गई।
Follow on Google News
एक झटके में 40% कर्मचारियों की छंटनी, लाखों की सैलरी वाले हुए अनइंप्लॉयड!
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    होली से ठीक पहले बेंगलोर से एक निराश करने वाली खबर आ रही है। यहां की एक स्टार्टअप कंपनी ने करीब 40 प्रतिशत लोगों की छंटनी कर दी है। जिसके बाद से ही सोशल मीडिया पर इस पूरे मामले को लेकर जोरदार और गुस्से से भरी बहस तेज हो गई। पेशे से सीए अर्पित गोयल ने एक पोस्ट किया। इस पोस्ट के मुताबिक बेंगलोर की स्टार्टअप कंपनी ने 92 लाख की सालाना सैलरी पाने वालों को भी नहीं बख्शा, उन्हें भी लेऑफ दे दिया। ऐसे में एक बड़ा सवाल प्राइवेट सेक्टर में काम कर रहे लोगों के लिए उठता है?

    पैकेज कितना भी बड़ा हो, असुरक्षा हमेशा है

    बेंगलोर की स्टार्टअप कंपनी द्वारा की गई इस छंटनी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि चाहे कितना भी बड़ा पैकेज क्यों ना हो? क्या प्राइवेट सेक्टर की नौकरी में मिलने वाला वह पैकेज सेफ है? क्योंकि कंपनी द्वारा की गई इस छंटनी का शिकार 92 लाख की सालाना पैकेज पाने वाले लोग भी हुए है। सोशल मीडिया पर इस पूरे मुद्दे पर लगातार बहस चल रही है। आम पब्लिक यही कह रही कि जितनी तेजी से यह स्टार्टअप कंपनियां ग्रो करती हैं, उतनी ही जल्दी मंदी के दौरान ये अपने कर्मचारियों को हानि भी पहुंचाती हैं। शुरूआती दौर में जब कंपनी के पास पैसे होते हैं तो वह बड़े पैकेजेज भी ऑफर करती है, और जैसे ही मंदी आती है या कंपनी लॉस से गुजर रही होती है वह धड़ल्ले से लोगों की छंटनी कर देती है। जो इन कंपनियों की विश्वसनीयता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है? 

    और पढ़ें: दुआओं का असर! अबू धाबी से अभिनेत्री ईशा गुप्ता की वतन वापसी

    लेऑफ किसी एक की कहानी नहीं

    लेऑफ एक ऐसा क्रिटिकल फेज है, जो आम लोगों को तोड़ कर रख देता है। जिसका जितना बड़ा पैकेज वो उतना ही ज्यादा असुरक्षा की भावना में जी रहा होता है। असल में ज्यादा पैकेज होने पर लोग रिस्क भी ज्यादा ले लेते हैं। ऐसा ही कुछ रिस्क बेंगलोर के इस लेऑफ केस में हुआ। बड़े पैकेज वाले कुछ इंप्लॉय बदलाव के एक बड़े फेज से गुजर रहे थे। कोई एक हफ्ते में पिता बनने वाला था तो कोई मेटरनिटी लीव का प्लान कर ही रही थी तबतक कंपनी द्वारा की गई इस छंटनी ने सबको चौंका दिया। अचानक किए  गए इस लेऑफ ने कंपनी के कर्मचारियों के जीवन में उथल-पुथल ला दिया।

    ये भी पढ़ें: इंदौर में दो नगर निगम कर्मचारियों की सीवर टैंक में मौत : जहरीली गैस से घुटा दम, चोइथराम मंडी गेट के पास हादसा

    सोशल मीडिया पर छिड़ी जोरदार बहस

    सोशल मीडिया पर कंपनी के द्वारा किए गए लेऑफ ने एक बड़ी बहस छेड़ दी है। बहुत से लोग ये कह रहे हैं कि बडे-बड़े पैकेज के लोग भी इस छंटनी का शिकार हुए हैं। फिर क्या फायदा इतने बड़े पैकेज का? इन स्टार्टअप कंपनियों को जबतक फंडिंग अच्छी मिलती रहती है वो कर्मचारियों को अच्छे पैकेजेज पर रखते हैं और जरा सी कंपनी लॉस में जाए तो लोगों को निकालते भी ये देर नहीं करते। 92 लाख का सालाना पैकेज भी इन नौकरियों में सुरक्षा का आधार नहीं और यह मामला सिर्फ आईटी सेक्टर के हाईपैकेज कर्मचारियों का ही नहीं बल्कि प्राइवेट सेक्टर की हर कंपनी का है। तो अब सवाल ये उठता है कि हाई पैकेज की ओर बढ़ा जाए या एक स्थिर नौकरी कर लाइफ स्टेबलिटी को बढ़ाया जाए।   

    Geetanjali Sharma
    By Geetanjali Sharma

    Latest Posts