छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पेश किया गया, जिसे डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा ने सदन के सामने रखा। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष ने विधेयक का विरोध करते हुए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया, जिसके बाद उनकी अनुपस्थिति में यह बिल पास कर दिया गया।
प्रस्तावित कानून के अनुसार किसी भी व्यक्ति को बल, दबाव, प्रलोभन, गलत जानकारी या कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराने पर पूरी तरह रोक रहेगी। सरकार का कहना है कि यह कानून जबरन और धोखाधड़ी से होने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए लाया गया है।
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अगर कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो उसे पहले जिला मजिस्ट्रेट या संबंधित अधिकारी को सूचना देनी होगी। इसके बाद प्रस्तावित धर्म परिवर्तन की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी और 30 दिनों के भीतर किसी भी व्यक्ति को आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार होगा।
विधेयक में धर्मांतरण से जुड़े कई पहलुओं को स्पष्ट किया गया है। इसमें प्रलोभन, दबाव, गलत जानकारी और सामूहिक धर्मांतरण जैसे शब्दों की स्पष्ट परिभाषा दी गई है। खास बात यह है कि सोशल मीडिया या डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किसी को धर्म बदलने के लिए प्रलोभन देना भी अपराध माना जाएगा। हालांकि अपने पैतृक धर्म में वापस लौटना इस कानून के तहत धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।
कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों के लिए कड़ी सजा तय की गई है:
इस विधेयक के तहत आने वाले सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे। इन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालय बनाए जाएंगे, ताकि मामलों का तेजी से निपटारा हो सके।
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