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डॉ. मोहन यादव बोले...पानी की बूंद-बूंद बचाने के लिए सनातन संस्कृति की पवित्र धारा का अभियान है जल गंगा संवर्धन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल गंगा संवर्धन अभियान हमारी सनातन संस्कृति की सबसे पवित्र धारा का अभियान है। जल की महत्ता ऐसी है कि इसके बिना कोई जीवित नहीं रह सकता है। पानी के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। डॉ. यादव इंदौर में जल गंगा संवर्धन अभियान के शुभारंभ अवसर को संबोधित कर रहे थे।  
पानी की बूंद-बूंद बचाने के लिए सनातन संस्कृति की पवित्र धारा का अभियान है जल गंगा संवर्धन

इंदौर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को गुड़ी पड़वा, विक्रम संवत्, चेटीचंड और चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश में तीसरे चरण के जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, जहां से 250 से अधिक नदियां निकलती हैं। मां नर्मदा के पवित्र जल से मध्यप्रदेश के साथ गुजरात में भी आनंद की धारा बह रही है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत तीन महीनों तक जल संचय की गतिविधियां चलाई जाएंगी, जिन पर 2500 करोड़ रुपए खर्च होंगे। अभियान गंगा दशहरा तक 139 दिन तक चलेगा। 

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इंदौर में विकास कार्यों की सौगात 

इंदौर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अमृत 2.0 परियोजना के तहत विभिन्न कार्यों का भूमि-पूजन किया। इनमें 12.72 करोड़ की लागत से बिलावली तालाब, 4.89 करोड़ से लिम्बोदी तालाब और 3.82 करोड़ से छोटा सिरपुर तालाब का जीर्णोद्धार शामिल है। कुल मिलाकर करीब 22 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगात दी गई। इस मौके पर उन्होंने जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई और कहा, जल ही जीवन है, जल है तो कल है के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना जरूरी है।

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राष्ट्रीय स्तर पर जल संरक्षण का अभियान 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण को राष्ट्रीय अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। मध्यप्रदेश का जल गंगा संवर्धन अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में प्रदेश में लाखों जल संरचनाओं का निर्माण और पुनरुद्धार किया गया है। इंदौर में भी बड़ी संख्या में बावड़ियों, तालाबों और कुओं का जीर्णोद्धार किया गया है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि यह केवल सरकारी नहीं, बल्कि जनभागीदारी का अभियान बने।

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नदियों का महत्व और ऐतिहासिक विरासत 

मुख्यमंत्री ने नदियों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, हमारी नदियां शरीर की रक्त धमनियों की तरह है, जो पृथ्वी माता को जीवन देती हैं। उन्होंने इंदौर के जानापाव से निकली चंबल नदी का उदाहरण देते हुए बताया कि यह आगे यमुना में मिलकर गंगा को समृद्ध करती है। उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य, अहिल्याबाई होल्कर और सिंधिया राजवंश द्वारा निर्मित जल संरचनाओं के संरक्षण पर जोर दिया और कहा कि इनका जीर्णोद्धार समय की आवश्यकता है।

भारतीय संस्कृति और नववर्ष का महत्व

मुख्यमंत्री ने विक्रम संवत् 2083 के शुभारंभ पर भारतीय संस्कृति की विशेषताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति पराक्रम, पुरुषार्थ, आनंद और उत्सव की संस्कृति है। बसंत ऋतु को प्रकृति का राजा बताते हुए उन्होंने कहा कि नववर्ष के अवसर पर चारों ओर उत्साह और उल्लास का वातावरण रहता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नवरात्रि, रामनवमी और दशहरा जैसे पर्व मंगल तिथियां हैं, इसलिए इन पर “मंगलकामनाएं” देना ही उचित होता है।

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आधुनिक जीवन में सतर्कता की जरूरत 

मुख्यमंत्री ने आधुनिक संसाधनों के उपयोग में सावधानी बरतने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि बिजली के उपकरणों के उपयोग में लापरवाही खतरनाक हो सकती है। एसी चलाते समय खिड़की-दरवाजे बंद रहने से संकट की स्थिति भी बन सकती है। उन्होंने घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बिजली के सर्किट की नियमित जांच कराने की आवश्यकता बताई और सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

इलेक्ट्रिक व्हीकल और सुरक्षा पर विशेष जोर 

इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि चार्जिंग के दौरान विशेष सावधानी जरूरी है और रात में परिवार की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। हाल ही में इंदौर में हुई दुखद घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मामले में विशेषज्ञों से चर्चा कर समाधान निकालने पर काम कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए सरकार हरसंभव प्रयास करेगी। 

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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