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भोपाल:एम्स भोपाल के सामने अवैध निर्माण पर कार्रवाई, 3 मंजिला बिल्डिंग का अतिरिक्त हिस्सा तोड़ा

भोपाल में एम्स भोपाल के गेट-3 के सामने स्थित एक पुरानी बिल्डिंग पर नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई की है। यह वही बिल्डिंग है जहां 27 मार्च को छज्जा गिरने से 8 लोग घायल हो गए थे।
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एम्स भोपाल के सामने अवैध निर्माण पर कार्रवाई, 3 मंजिला बिल्डिंग का अतिरिक्त हिस्सा तोड़ा

भोपाल में एम्स भोपाल के गेट-3 के सामने स्थित एक पुरानी बिल्डिंग पर आखिरकार नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई की है। बुधवार को तीन मंजिला इस इमारत के अवैध हिस्से को तोड़ दिया गया। यह वही बिल्डिंग है जहां 27 मार्च को छज्जा गिरने से 8 लोग घायल हो गए थे। घटना के बाद नोटिस देने के बावजूद निर्माण जारी रहने पर निगम ने सख्त कदम उठाया।

ग्राउंड फ्लोर पर मेडिकल, ऊपर चल रही थीं कमर्शियल गतिविधियां

यह करीब 35 साल पुरानी इमारत है जिसमें ग्राउंड फ्लोर पर मेडिकल स्टोर संचालित हो रहा था जबकि ऊपर के फ्लोर पर पैथोलॉजी समेत अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चल रही थीं। जांच में सामने आया कि यहां अवैध तरीके से अतिरिक्त मंजिल का निर्माण किया जा रहा था।

नोटिस के बावजूद जारी रहा निर्माण

नगर निगम ने इस अवैध निर्माण को लेकर जनवरी 2026 और 13 मार्च 2026 को दो बार नोटिस जारी किए थे। इसके बावजूद निर्माण कार्य नहीं रोका गया। 27 मार्च की सुबह अचानक बिल्डिंग का छज्जा गिर गया जिससे नीचे खड़े लोग और वाहन उसकी चपेट में आ गए। इस हादसे में मनोज कुमार (56), नंदनी (23), अभय (52), तनुश्री (17) और सोम प्रकाश (61) समेत कुल 8 लोग घायल हुए थे। इनमें नंदनी की हालत गंभीर बताई गई थी। मलबे में कई मोटरसाइकिलें भी दब गई थीं।

जांच में सामने आई बड़ी लापरवाही

हादसे के बाद हुई जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:

  • इमारत 35 साल पुरानी होने के बावजूद उस पर अतिरिक्त मंजिल बनाई जा रही थी
  • छज्जा अनुमति से ज्यादा बाहर निकाला गया था
  • सेंट्रिंग (सपोर्ट) सही तरीके से नहीं लगाया गया था
  • निर्माण की गुणवत्ता भी मानकों के अनुरूप नहीं थी

इन्हीं कारणों से छज्जा कमजोर होकर ढह गया।

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अनुमति से ज्यादा निर्माण, नियमों का खुला उल्लंघन

नगर निगम के मुताबिक इस भवन को 2014 में सिर्फ ग्राउंड प्लस एक मंजिल (G+1) की अनुमति दी गई थी। बाद में इसे बढ़ाकर G+2 बनाया गया और कंपाउंडिंग भी करा ली गई। लेकिन हादसे के वक्त एक और मंजिल का निर्माण जारी था जो पूरी तरह अवैध था। करीब 2400 वर्ग फीट के प्लॉट पर लगभग 4000 वर्ग फीट निर्माण किया जा रहा था जबकि अधिकतम अनुमति करीब 3300 वर्ग फीट की थी। यानी करीब 700 वर्ग फीट ज्यादा निर्माण किया गया।

रेसिडेंशियल प्लॉट पर कमर्शियल उपयोग

जांच में यह भी सामने आया कि जिस प्लॉट पर यह बिल्डिंग बनी है वह रेसिडेंशियल कैटेगरी में आता है लेकिन वहां कमर्शियल गतिविधियां चलाई जा रही थीं। यह भी नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

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निगम की कार्रवाई और आगे की सख्ती

हादसे के बाद निगम ने पहले निर्माण की अनुमति निरस्त की और अब अवैध हिस्से को तोड़ने की कार्रवाई की है। भवन मालिक अनिल सिंह के खिलाफ आगे भी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। नगर निगम का कहना है कि शहर में जहां-जहां भी अवैध निर्माण होगा वहां इसी तरह सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

मास कम्युनिकेशन में Ph.D और M.Phil पूर्ण की है तथा टीवी और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते ...Read More

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