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थिएटर ऐसी विधा जो जीने का सही तरीका सिखाता है : रघुबीर

भारत भवन में बाल फिल्म समारोह में आए बॉलीवुड एक्टर रघुबीर यादव ने आईएम भोपाल से की खास बातचीत
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थिएटर ऐसी विधा जो जीने का सही तरीका सिखाता है : रघुबीर

बच्चों को ध्यान में रखते हुए फिल्मों को तैयार करना चाहिए। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि जो बच्चे देख रहे है उससे उन्हें क्या सीख मिल रही है। आप ऐसा कुछ दिखाए, जिससे वह कुछ हासिल कर सकें। फिल्म एक ऐसा जरिया है इसके माध्यम से आप बहुत कुछ कह सकते हैं। इसके लिए मेहनत बहुत करनी पड़ेगी, लेकिन हमारे यहां मेहनत करना कम कर दिया है। अब सिर्फ कमाई पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। यह कहना है रघुबीर यादव का, जो कि भारत भवन में आयोजित बाल फिल्म समारोह में शामिल होने आए थे। इस दौरान उन्होंने आईएम भोपाल से खास बातचीत की। उन्होंने कहा कि अभी जो फिल्म आ रही हैं। उसे एक बार देखने के बाद कोई उसे नहीं देखता है। पहली की फिल्मों को अभी भी देखना पसंद करते है। हमें कंटेंट पर काम करना चाहिए।

बच्चों के लिए काम करना बड़ी जिम्मेदारी

रघुबीर कहते हैं कि फिल्मों में बच्चों की वजह से आया। एक फिल्म की आसमां से गिरा बच्चों के लिए की थी। अब उस तरह की स्क्रिप्ट आती ही नहीं है। क्योंकि अब लोगों ने पढ़ना-लिखना छोड़ दिया है। बच्चों के लिए काम करना बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। रघुबीर कहते है कि आज के समय में ज्यादातर स्कूलों में थिएटर सब्जेक्ट के रूप में है। मुझे मौका मिलता है मैं बच्चों की वर्कशॉप भी लेता हूं। थिएटर ही एक ऐसी विधा है, जो आपको जीने का सही तरीका सिखाता है। साथ ही साउथ फिल्मों पर बात करते हुए कहा कि बॉलीवुड की फिल्मों में बहुत कमियां है, हमें अपने कंटेंट के पर काम करने की जरूरत है।

फिल्मों को देखकर इस तरफ न आए

रघुबीर ने कहा कि जो युवा फिल्मों में आना चाहते हैं, वह पहले मेहनत करें, कुछ सीखे। फिल्मों को देखकर इस तरफ आने की कोशिश न करें और फिल्मों से न सीखे। अपने आपको पहचाने फिर आगे बढ़े। वहीं उन्होंने कहा कि पंचायत सीजन 3 की शूटिंग एक महीने से सीहोर में कर रहा हूं, जो कि दिसंबर में रिलीज होगी।

अवॉर्ड पाने के लिए काम नहीं करता

रघुबीर बताते हैं मैंने कभी अवॉर्ड लेने के लिए काम नहीं किया। कई लोग आते हैं कि मैं एक ऐसी फिल्म बना रहा हूं। जो कि नेशनल अवॉर्ड के लिए है, तो मैं उन्हें पहले ही मना कर देता हूं। साथ ही कहता हूं कि पहले अपनी नियत ठीक करो, अच्छी फिल्म बना लो फिर अवॉर्ड लेना। वहीं दिल्ली केस पर रघुबीर ने कहा कि क्राइम की फिल्में बच्चे देखते हैं तो कुछ न कुछ जेहन में आता ही है। मेकर्स की बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वह क्या दिखा रहे है।

Javedakhtar Ansari
By Javedakhtar Ansari
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