एंटरटेनमेंट डेस्क। ऑस्कर-नॉमिनेटेड फिल्म ‘द वॉइस ऑफ हिंद रजब’ की भारत में रिलीज फिलहाल अटक गई है। फिलिस्तीनी बच्ची की दर्दनाक सच्ची कहानी पर आधारित इस फिल्म को अब तक सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से सर्टिफिकेट नहीं मिला है, जिसके चलते इसकी रिलीज टाल दी गई है।
फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर मनोज नंदवाना के मुताबिक, फिल्म को CBFC के पास भेजा गया था और बोर्ड को इसमें कोई आपत्तिजनक कंटेंट नहीं मिला। हालांकि, इसे “संवेदनशील” मानते हुए मंजूरी नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि आमतौर पर फिल्मों में संशोधन के लिए कट्स सुझाए जाते हैं, लेकिन इस केस में ऐसा कुछ नहीं हुआ। फिलहाल फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेज दिया गया है, लेकिन कमेटी के गठन की टाइमलाइन स्पष्ट नहीं है।
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डिस्ट्रीब्यूटर का दावा है कि फिल्म में न तो हिंसा है, न अश्लील दृश्य और न ही कोई राजनीतिक संवाद। इसके बावजूद भारत-इजराइल संबंधों को ध्यान में रखते हुए फिल्म को मंजूरी नहीं दी गई। यह मामला अब सेंसरशिप से आगे बढ़कर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस का रूप लेता दिख रहा है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने फिल्म को सर्टिफिकेट न मिलने पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन का मुद्दा बताया है। उनका मानना है कि ऐसी फिल्मों को दर्शकों तक पहुंचने का मौका मिलना चाहिए।
ट्यूनीशियाई फिल्ममेकर काउथर बेन हानिया द्वारा निर्देशित यह फिल्म हिंद रजब की सच्ची कहानी पर आधारित है। जनवरी 2024 में गाजा सिटी से भागते समय उसकी कार पर हमला हुआ था। फिल्म में कहानी रेड क्रिसेंट वालंटियर्स के नजरिए से दिखाई गई है। खास बात यह है कि फिल्म में हिंद रजब की असली आवाज का इस्तेमाल किया गया है। 12 दिन बाद उसका शव उसके परिवार और दो वालंटियर्स के साथ मिला था। यह कहानी मानवीय संवेदनाओं और युद्ध के असर को बेहद करीब से दिखाती है।
फिल्म का प्रीमियर वेनिस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सितंबर 2025 में हुआ था, जहां इसे ग्रैंड ज्यूरी प्राइज मिला। इसके अलावा फिल्म को टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी प्रदर्शित किया जा चुका है।
डिस्ट्रीब्यूटर मनोज नंदवाना का कहना है कि अगर रिवाइजिंग कमेटी बनने में देरी होती है, तो फिल्म की रिलीज और ज्यादा टल सकती है और इसकी प्रासंगिकता पर भी असर पड़ सकता है।