भोपाल:TET अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का घेराव, DPI मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन

भोपाल में टीईटी अनिवार्यता के आदेश के विरोध में बुधवार को शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) मुख्यालय का घेराव किया।
TET अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का घेराव, DPI मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल में टीईटी अनिवार्यता के आदेश के विरोध में बुधवार को शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) मुख्यालय का घेराव किया। इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक सड़कों पर उतरे और नारेबाजी करते हुए परीक्षा रद्द करने की मांग उठाई। साथ ही प्रदेशभर में जिला कलेक्ट्रेट कार्यालयों में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपे जा रहे हैं।

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    DPI के बाहर जुटे शिक्षक, परीक्षा रद्द करने की मांग

    अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के सदस्य उपेंद्र कौशल ने बताया कि राजधानी भोपाल में आसपास के जिलों से शिक्षक पहुंचकर DPI कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांग टीईटी परीक्षा को रद्द करना है। साथ ही प्रदेशभर में भी संयुक्त मोर्चा के सदस्य जिला स्तर पर कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंप रहे हैं।

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    आदेश से 1.5 लाख शिक्षक प्रभावित होने का दावा

    शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस आदेश से प्रदेश के करीब 1.5 लाख शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं। इनमें लगभग 70 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति 2011 से पहले हुई थी। इन शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति के समय टीईटी अनिवार्य नहीं था, ऐसे में अब इसे लागू करना गलत है और उनकी नौकरी पर खतरा खड़ा कर रहा है।

    DPI का आदेश: 2 साल में टीईटी पास करना जरूरी

    हाल ही में DPI भोपाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय बाकी है उन्हें अनिवार्य रूप से टीईटी परीक्षा पास करनी होगी। आदेश में साफ कहा गया है कि संबंधित शिक्षकों को दो वर्ष के भीतर परीक्षा पास करनी होगी अन्यथा उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है।

    'रेट्रोस्पेक्टिव फैसला' बता रहे शिक्षक

    शिक्षक संगठनों का कहना है कि आरटीई एक्ट 2009 में लागू हुआ और टीईटी 2011 से अनिवार्य किया गया। ऐसे में उससे पहले नियुक्त शिक्षकों पर यह नियम लागू करना “रेट्रोस्पेक्टिव” फैसला है जो न सिर्फ अन्यायपूर्ण है बल्कि कानूनी रूप से भी कमजोर है।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला दे रही सरकार

    स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर लिया गया है। हालांकि इस आदेश के बाद शिक्षकों में व्यापक असंतोष देखने को मिल रहा है।

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    आंदोलन तेज करने की चेतावनी, 11 अप्रैल को अगला कदम

    शिक्षक संगठनों ने साफ किया है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन करते हुए स्थानीय विधायक, मंत्री और सांसदों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इस दौरान टीईटी आदेश को निरस्त करने और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग प्रमुख रहेगी।

    Dr. Sumit  Shrivastava
    By Dr. Sumit Shrivastava

    सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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