थरूर बोले :नेहरू को सुविधाजनक बलि का बकरा बनाया गया, उनकी गलती स्वीकारना जरूरी, लेकिन हर परेशानी के लिए वे जिम्मेदारी नहीं
वहीं अपने लेखक जीवन के एक्सपीरियेंस शेयर करते हुए शशि थरूर ने बताया कि बचपन में अस्थमा की बीमारी के कारण उनका अधिकतर समय घर पर ही गजरता था। उस दौर में किताबें ही उनकी सबसे करीबी साथी बन गईं। और फिर यहीं से पढ़ने और लिखने की आदत विकसित हुई।
Aakash Waghmare
9 Jan 2026

























