PU Special :भोपाल की बस्तियों के बच्चों ने नुक्कड़ नाटक से बदली पहचान, अब सरकारी अभियानों में कर रहे लोगों को जागरूक

भोपाल की बस्तियों के 60 से अधिक बच्चे और युवा सहारा परफॉर्मिंग आर्ट्स अकादमी के जरिए नशामुक्ति, बाल विवाह, महिला हिंसा, साइबर सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर नुक्कड़ नाटक से जागरूकता फैला रहे हैं।
भोपाल की बस्तियों के बच्चों ने नुक्कड़ नाटक से बदली पहचान, अब सरकारी अभियानों में कर रहे लोगों को जागरूक
बस्तियों के बच्चों ने नुक्कड़ नाटक से बदली पहचान

पल्लवी वाघेला, भोपाल। जिन बच्चों और युवाओं के लिए कभी बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाना दूर का सपना था, आज वही अपनी कला के जरिए समाज में जागरूकता फैलाने का काम कर रहे हैं। भोपाल की झुग्गी बस्तियों से निकलकर इन बच्चों और युवाओं का सफर अब जनजागरूकता अभियानों तक पहुंच गया है। नुक्कड़ नाटक, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए ये नशामुक्ति, बाल विवाह, महिला हिंसा, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। ये सभी बच्चे और युवा सहारा साक्षरता एज्यूकेशनल एंड सोशल वेलफेयर सोसायटी द्वारा संचालित सहारा परफॉर्मिंग आर्ट्स अकादमी से जुड़े हैं। वर्ष 2010 में बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू हुई यह पहल आज 60 से अधिक बच्चों और युवाओं के समूह का रूप ले चुकी है। संस्था ने इसी साल सहारा परफॉर्मिंग आर्ट्स अकादमी की विधिवत शुरुआत की है जिसके माध्यम से बच्चों को प्रशिक्षण के साथ विभिन्न कार्यक्रमों और सरकारी अभियानों में अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर भी मिल रहे हैं।

38 बच्चों से शुरू हुआ सफर, अब 60 से अधिक कलाकार

सहारा साक्षरता सोसायटी ने वर्ष 2010 में बस्तियों के वंचित परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए लर्निंग सेंटर शुरू किया था। पढ़ाई के साथ बच्चों को रोचक गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर देने के लिए नृत्य, संगीत और अभिनय का प्रशिक्षण भी दिया जाने लगा। इसी पहल से 38 बच्चों का एक समूह तैयार हुआ, जो धीरे-धीरे बढ़कर 60 से अधिक बच्चों और युवाओं तक पहुंच गया। समय के साथ इस समूह के कई बच्चे युवा हो गए लेकिन कला से उनका जुड़ाव बना रहा। अब वे छोटे बच्चों के साथ मिलकर प्रस्तुतियां देते हैं और सामाजिक मुद्दों पर लोगों को जागरूक करते हैं। अकादमी की शुरुआत के बाद इस गतिविधि को अधिक व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

वल्लभ नगर से कोलार तक की बस्तियों के बच्चे शामिल

इस समूह में भोपाल के वल्लभ नगर, भीम नगर, 1100 क्वार्टर क्षेत्र, कोलार क्षेत्र, श्याम नगर सहित कई बस्तियों के बच्चे और युवा शामिल हैं। संस्था का शुरुआती उद्देश्य वंचित परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ना था लेकिन नृत्य और अभिनय में उनकी रुचि ने इस पहल को एक नई दिशा दे दी। बच्चों के लिए कला केवल मंच पर प्रस्तुति देने का माध्यम नहीं रही बल्कि इसके जरिए वे अपने आसपास की समस्याओं को समझने और उन पर बात करने लगे। नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से वे समाज में मौजूद कुरीतियों और गंभीर मुद्दों को लोगों के सामने रखते हैं। बच्चों का कहना है कि इस पहल से उन्हें खुद शिक्षा से जुड़ने में मदद मिली। इसके साथ ही उनके नाटकों और प्रस्तुतियों का असर उनके दोस्तों और परिचितों पर भी पड़ा है। कुछ साथियों ने नशा छोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाए, तो कुछ ने बाल विवाह और घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाई। वहीं कुछ परिचित बच्चे अब पर्यावरण संरक्षण और साइबर सुरक्षा जैसे विषयों पर जागरूकता के काम से जुड़ रहे हैं।

सरकारी अभियानों में भी निभा रहे अहम भूमिका

अकादमी से जुड़े बच्चे और युवा अब विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रमों में भी भाग ले रहे हैं। इनमें जिला पंचायत भोपाल का सेवा संकल्प अभियान और कई सामाजिक जागरूकता अभियान शामिल हैं। नुक्कड़ नाटकों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए वे नशामुक्ति, माहवारी संबंधी जागरूकता, बाल विवाह, महिला हिंसा, बाल मजदूरी, शिक्षा का अधिकार, मतदाता अधिकार, पर्यावरण संरक्षण, साइबर सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और यौन शोषण के खिलाफ जागरूकता जैसे विषयों पर लोगों तक संदेश पहुंचा रहे हैं। 'सेक्सुअल अब्यूज अब और नहीं' जैसे विषयों पर भी उनकी प्रस्तुतियां लोगों को जागरूक करने का प्रयास करती हैं।

अकादमी की प्रशिक्षक शिव कुमारी यादव और रजनी देवी के मार्गदर्शन में कलाकारों की दो टीमें तैयार की गई हैं। ये टीमें भोपाल और आसपास के अलग-अलग क्षेत्रों में नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देती हैं। इनके माध्यम से लोगों को सामाजिक समस्याओं के साथ शासकीय योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी भी दी जाती है। इस काम के लिए फंडिंग एनजीओ के प्रयासों और शासकीय अभियानों में सरकार के माध्यम से उपलब्ध होने वाली सहायता से की जाती है।

कला के जरिए सकारात्मक बदलाव की कोशिश

संस्था का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को ऐसा मंच उपलब्ध कराना है, जहां वे अपनी प्रतिभा को निखार सकें, आत्मविश्वास हासिल करें और समाज में सकारात्मक बदलाव के सहभागी बनें। बस्तियों से शुरू हुआ यह सफर अब प्रशासन के जनजागरूकता अभियानों तक पहुंच चुका है। संस्था के संस्थापक शिवराज कुशवाह के अनुसार पहले इन कार्यक्रमों में बच्चे दर्शक की भूमिका में होते थे लेकिन अब वे खुद कलाकार बनकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। उनका मानना है कि जब बच्चे अपनी भाषा, अनुभव और अभिनय के जरिए किसी सामाजिक मुद्दे को सामने रखते हैं, तो उसका लोगों पर अधिक प्रभाव पड़ सकता है।

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बाल विवाह रुकवाने में मदद मिली, तब आत्मविश्वास बढ़ा

कोलार बस्ती की हर्षिता भौरवंशी ने बताया कि लोगों को जागरूक करने के इस सफर में वे खुद भी कई नई बातें सीख रही हैं। उनके मुताबिक स्कूल में अब उनकी एक अलग पहचान बन गई है। हर्षिता ने बताया कि उनके नाटक और डांस की प्रस्तुति देखने के बाद उनकी एक दोस्त ने अपने परिवार में बाल विवाह रुकवाने में मदद की। हर्षिता के अनुसार इस घटना के बाद उन्हें बहुत आत्मविश्वास महसूस हुआ। उनके लिए यह अनुभव इस बात का उदाहरण बना कि कला के जरिए दिया गया संदेश लोगों की सोच और फैसलों पर असर डाल सकता है।

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Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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