सिंधिया की सीट को लेकर सस्पेंस कायम, केंद्रीय मंत्री शाह का वायदा पूरा होगा या नए चेहरे को मिलेगा मौका?
राज्यसभा उपचुनाव: एक सीट के लिए कई दावेदारों की दौड़

भोपाल। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा खाली की गई राज्यसभा की सीट पर चुनाव की उल्टी गिनती शुरू होते ही दावेदारों की दौड़ तेज हो गई है। लोकसभा चुनाव के बाद प्रदेश की बदली सियासी तस्वीर के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि पार्टी उच्च सदन के लिए किसे मौका देगी। गुना संसदीय क्षेत्र के सांसद रहे केपी यादव का टिकट काटकर इस बार पार्टी के सिंधिया को प्रत्याशी बनाया था। चुनाव के दौरान केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने सार्वजनिक मंच से केपी यादव को दिल्ली ले जाने का वायदा किया था। सवाल यही है कि क्या शाह अपने वायदे को निभाएंगे या फिर किसी और को मौका मिलेगा।
राज्यसभा की यह सीट भाजपा के ही खाते में जाएगी यह तय माना जा रहा है। इस बार संभावना यही है कि पार्टी इस सीट पर सामान्य वर्ग के किसी नेता का नाम आगे बढ़ा सकी है। क्योंकि छह महीने पहले फरवरी 2024 में भाजपा ने दलित समाज, ओबीसी और महिला कोटे से क्रमश: एल मुरुगन, उमेश नाथ महाराज, बंशीलाल गुर्जर और माया नारोलिया को राज्यसभा भेजा था। इस बार जातीय और सियासी समीकरण के हिसाब से ठाकुर अथवा ब्राह्मण समाज के नेता को मौका दिया जा सकता है। लेकिन केंद्रीय मंत्री शाह के वायदे पर अमल हुआ तो एक बार फिर ओबीसी प्रत्याशी को प्रतिनिधित्व मिल सकता है। भाजपा हाईकमान अभी इस मुद्दे पर विचार मंथन में जुटा है।












