सबरीमाला मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त:PIL पर उठाए गंभीर सवाल, एससी ने याचिकाकर्ता को लगाई फटकार

कोर्ट ने कहा कि खबरों के आधार पर दायर याचिका गलत है। गैर-आस्थावान लोगों द्वारा परंपराओं को चुनौती देना उचित नहीं। पीआईएल के बढ़ते दुरुपयोग पर भी अदालत ने नाराजगी जताई। वहीं मामले में सख्त टिप्पणियों ने नई बहस छेड़ दी है।
याचिका पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि इस तरह की जनहित याचिका को शुरुआत में ही खारिज कर देना चाहिए था। अदालत के अनुसार अखबारों की खबरों के आधार पर गंभीर कानूनी मुद्दे उठाना सही तरीका नहीं है। कोर्ट ने इस तरह की याचिकाओं को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया। इससे न्यायपालिका का समय भी प्रभावित होता है। अदालत ने संकेत दिया कि ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है।
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धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप गलत-कोर्ट
अदालत ने कहा कि गैर-आस्थावान लोगों द्वारा मंदिर की परंपराओं को चुनौती देना एक संवेदनशील और गंभीर विषय है। धार्मिक मान्यताओं से जुड़े मामलों में बाहरी हस्तक्षेप को लेकर कोर्ट ने चिंता जताई। न्यायाधीशों ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे मामलों में संतुलन और समझ जरूरी है। परंपराओं और अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना अहम है। कोर्ट की यह टिप्पणी बहस का केंद्र बन गई है।
PIL के दुरुपयोग पर जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आजकल PIL का स्वरूप बदलता जा रहा है। इसे पब्लिक इंटरेस्ट की जगह पॉलिटिकल या पर्सनल इंटरेस्ट के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। कोर्ट ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया। न्यायपालिका ने स्पष्ट किया कि इस चीज पर रोक लगाना जरूरी है। इससे न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है।
वकीलों पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान जजों ने इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन से कुछ सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि क्या वे देश के धार्मिक मामलों के निर्णायक हैं। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि वकीलों को न्यायालय का समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। उन्हें अपने पेशेवर दायित्वों पर ध्यान देना चाहिए। कोर्ट की इस सख्ती ने सभी पक्षों को स्पष्ट संदेश दिया है।












