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जेल नहीं जाएंगे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद :POCSO केस में सुप्रीम कोर्ट से राहत, अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग खारिज

नाबालिग बटुकों के कथित यौन उत्पीड़न और POCSO मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद को राहत दी है। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने जमानत रद्द करने की मांग की थी।
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POCSO केस में सुप्रीम कोर्ट से राहत, अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग खारिज

प्रयागराज। नाबालिग बटुकों के कथित यौन उत्पीड़न और पॉक्सो एक्ट मामले में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। यह याचिका शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की ओर से दाखिल की गई थी। उन्होंने मांग की थी कि, हाईकोर्ट द्वारा दी गई अग्रिम जमानत रद्द की जाए और दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी हो।

क्या था मामला?

पूरा विवाद प्रयागराज के माघ मेला और महाकुंभ से जुड़ा है। आरोप लगाया गया था कि, मठ में रहने वाले नाबालिग बटुकों का यौन शोषण किया गया। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया था कि, माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों के साथ कथित यौन उत्पीड़न हुआ। इसके बाद 8 फरवरी को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। कोर्ट के आदेश पर 21 फरवरी को झूंसी थाने में FIR दर्ज हुई। इस FIR में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और कुछ अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी थी अग्रिम जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच ने 25 मार्च को दोनों आरोपियों को अग्रिम जमानत दी थी। कोर्ट ने कहा था कि चार्जशीट दाखिल होने तक उनकी गिरफ्तारी नहीं होगी। हालांकि अदालत ने जमानत के साथ कई शर्तें भी लगाई थीं। इनमें जांच में सहयोग करना, साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करना और मीडिया में बयानबाजी से बचना शामिल था।

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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

हाईकोर्ट के फैसले से असंतुष्ट शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की। याचिका में आरोप लगाया गया कि हाईकोर्ट ने गंभीर आरोपों के बावजूद राहत दे दी। आशुतोष महाराज का कहना था कि उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश के 24 घंटे के भीतर ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, ताकि न्याय प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया है। इससे शंकराचार्य और उनके शिष्य को फिलहाल बड़ी राहत मिल गई है।

कोर्ट ने जमानत के साथ लगाई थीं 6 शर्तें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देते समय कुछ अहम शर्तें तय की थीं-

  1. आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे।
  2. मामले से जुड़े लोगों को धमकी या लालच नहीं देंगे।
  3. जांच और ट्रायल में पूरा सहयोग करेंगे।
  4. कोर्ट की अनुमति के बिना विदेश नहीं जाएंगे।
  5. मीडिया में इंटरव्यू या बयानबाजी नहीं करेंगे।
  6. शर्तों का उल्लंघन होने पर जमानत रद्द करने की मांग की जा सकती है।

शंकराचार्य ने क्या कहा?

जमानत मिलने के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था कि कभी-कभी ऐसा लगता है कि कानून को कुछ लोग जाल की तरह इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसलों से लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बढ़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि, हर आरोप सच नहीं होता और कानून का इस्तेमाल किसी को फंसाने के लिए भी किया जा सकता है।

क्या कह रहा है शिकायतकर्ता पक्ष?

आशुतोष ब्रह्मचारी और उनकी प्रवक्ता रीना एन. सिंह ने पहले ही साफ कर दिया था कि वे हाईकोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना था कि वे न्याय के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। हालांकि सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद शिकायतकर्ता पक्ष को बड़ा झटका माना जा रहा है।

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पुलिस जांच में क्या हुआ?

FIR दर्ज होने के बाद प्रयागराज पुलिस ने कई चरणों में जांच की। पुलिस टीम ने माघ मेला क्षेत्र का निरीक्षण किया, CCTV फुटेज कब्जे में लिए और कथित पीड़ित बटुकों के बयान दर्ज किए। 25 फरवरी को नाबालिग बच्चों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। इसके बाद मेडिकल जांच भी कराई गई। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि, मेडिकल रिपोर्ट में शोषण की पुष्टि हुई थी, हालांकि इस पर आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।

शंकराचार्य पक्ष ने आरोपों को बताया साजिश

शंकराचार्य के वकील पीएन मिश्रा ने अदालत में कहा था कि आरोप पूरी तरह झूठे और साजिश के तहत लगाए गए हैं। उनका दावा था कि जिस बच्चे के शोषण की बात कही जा रही है, वह कभी मठ का हिस्सा ही नहीं रहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि, कुछ लोग धार्मिक और प्रशासनिक कारणों से शंकराचार्य की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।

कौन हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का जन्म 15 अगस्त 1969 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में हुआ था। उनका मूल नाम उमाशंकर था। उन्होंने वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री और आचार्य की पढ़ाई की। वेदांत, ज्योतिष और हिंदू दर्शन में उनका गहरा अध्ययन रहा है। 2006 में उन्होंने स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से संन्यास दीक्षा ली थी। 2022 में गुरु स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद उन्हें ज्योतिर्मठ पीठ का उत्तराधिकारी घोषित किया गया था। हालांकि उनके पट्टाभिषेक को लेकर भी विवाद हुआ था और सुप्रीम कोर्ट ने उस पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

कौन हैं आशुतोष ब्रह्मचारी?

आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कांधला क्षेत्र से आते हैं। वे जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य हैं और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट से भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने 2022 में संन्यास लिया था और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। उनके खिलाफ पहले से कई आपराधिक मुकदमे दर्ज होने की भी जानकारी सामने आई है।

Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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