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स्टोरीनामा में बच्चों को सुनाई जा रहीं कहानियां, ताकि उनमें किताबें पढ़ने का इंटरेस्ट पैदा हो

इंटरनेशनल रीड टू मी डे: जब बच्चे कहानियां सुनते हैं, तो रीडिंग और राइटिंग में बढ़ती है रुचि
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स्टोरीनामा में बच्चों को सुनाई जा रहीं कहानियां, ताकि उनमें किताबें पढ़ने का इंटरेस्ट पैदा हो

प्रीति जैन- ‘इंटरनेशनल रीड टू मी डे’ एक ऐसा दिन है जहां बच्चों की रीडिंग हैबिट्स डेवलप करने के लिए बड़ों को उन्हें पढ़कर सुनाने के लिए मोटिवेट किया जाता है। इस विशेष आयोजन का उद्देश्य लोगों में किताबों के प्रति आजीवन प्रेम जगाना है। जब बच्चे और बड़े साथ मिलकर बुक रीडिंग करते हैं, तो वे ज्यादा बेहतर तरीके से किताबों का आनंद ले पाते हैं, और फिर जब यह बच्चों की आदत में आ जाता है तो वे खुद किताबें पढ़ने लगते हैं। इसे लेकर स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में स्टोरीनामा सीरीज का आयोजन किया जा रहा है जिसमें बच्चों को स्टोरीटेलर के माध्यम से कहानी सुनने और फिर खुद कहानी सुनाने का मौका मिलता है। समर वेकेशन में यहां मई-जून में चिल्ड्रन लिटरेरी फेस्टिवल होने जा रहा है।

रीडिंग क्लब और प्रजेंटेशन देकर किताबों से कर रहे कनेक्ट

बच्चों से लेकर बड़ों तक में रीडिंग स्किल्स को बढ़ावा देने के लिए शहर में रीडिंग क्लब और स्टोरी टेलर ग्रुप्स शुरू हो गए हैं, जो कि बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए किबातों के प्रति रुझान बढ़ाने का प्रयास करते हैं। इस समय भोपाल की स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में 6 से 15 साल तक के 300 बच्चे रेगुलर मेंबर हैं, और बाकि बच्चे फैमिली मेंबरशिप में शामिल हैं। समर वेकेशन में बच्चों और युवाओं को लाइब्रेरी से जोड़ने के लिए शहर के शासकीय, निजी संस्थानों से लेकर कॉलेजेस तक में लाइब्रेरी की टीम प्रजेन्टेशन देकर बुक रीडिंग को प्रमोट कर रही है। इसके अलावा बच्चों के लिए किताबों के नए कलेक्शन जारी हो रहे हैं।

वॉकेबलरी, स्पीकिंग और लिसनिंग स्किल्स सुधरती है

इंटरनेशनल रीड टू मी डे का मकसद बच्चों तक पहुंचना, उन्हें कहानियों का आनंद लेने और उनसे सीखने का अवसर प्रदान करना है। हम लाइब्रेरी में स्टोरीनामा सीरीज चला रहे हैं जिसे बच्चे बहुत एंजॉय करते हैं, इसमें स्टोरीटेलर उन्हें मजेदार ढंग से कहानियां सुनाते हैं, जिससे उनकी वॉकेबलरी, स्पीकिंग स्किल्स, लिसनिंग स्किल्स और एक्सप्रेशंस बेहतर होते हैं। इसके बाद फिर वे उन कहानियों को सुनाते हैं, जो उन्होंने पढ़ीं है। इस तरह सुननेसु नाने का माहौल बनता है। हम मई-जून में बच्चों के लिए चिल्ड्रन लिटरेरी फेस्टिवल भी करने जा रहे हैं। साथ ही बच्चों की पसंद के नए कलेक्शन भी रिलीज होंगे। -रनदीप सिंह, मैनेजर, एसवीएल

बढ़ती है बच्चों की थिंकिंग स्किल

पैरेंट्स या टीचर्स जब स्टोरी सुनाते हैं तो बच्चों की इमेजिनेशन पावर बढ़ती है। मैं देखती हूं कि उनकी सवाल करने और सोचने की क्षमता बढ़ती है। इसका असर उनकी पढ़ाई पर भी नजर आता है। बच्चों की रुचि के हिसाब से पैंरेट्स उन्हें कहानी सुना सकते हैं। -डॉ. सीमा रायजादा, प्रेसीडेंट, क्लब लिटराटी

कहानी सुनीं तो लिखने भी लगी

मेरी मम्मी मुझे रोज कहानियां सुनाती हैं जिससे मेरा इंटरेस्ट बुक रीडिंग में बढ़ा। मैं लाइब्रेरी जाकर वहीं बैठकर किताबें पढ़ती हूं। अब तो मैंने एक फेयरी टेल बुक भी है लिख ली है, जिसे पब्लिश भी कराया है। अब मैं इस कहानी का पार्ट-2 भी लिखने जा रही हूं। - वरदा रघुराज, कक्षा पांचवीं, डीपीएस

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By People's Reporter
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