Meenakshi Natrajan's Nomination Reject : नटराजन का नामांकन ऐसे आधार पर खारिज किया जिस मामले में संज्ञान तक नहीं लिया : सिंघवी

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द किए जाने के बाद पार्टी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है। बुधवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मिला और रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को निरस्त करने की मांग की। कांग्रेस का आरोप है कि नामांकन रद्द करने का फैसला न केवल कानूनी रूप से गलत है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए भी नुकसानदायक है।
सिंघवी ने फैसले को बताया अवैध
चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर का आदेश पूरी तरह से अनुचित, स्पष्ट रूप से अवैध और कानून के विपरीत है। उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ जिस मामले का हवाला देकर नामांकन रद्द किया गया है, उसमें अब तक किसी सक्षम अदालत ने संज्ञान तक नहीं लिया है। ऐसे में उस मामले का उल्लेख न करना कोई कानूनी त्रुटि नहीं माना जा सकता। सिंघवी ने कहा कि चुनाव आयोग के पास इस गलती को सुधारने और न्याय सुनिश्चित करने की संवैधानिक शक्ति है।
लोकतंत्र और संविधान की भावना पर चोट का आरोप
सिंघवी ने आगे कहा कि नामांकन रद्द होने से चुनावी मुकाबला असमान हो गया है, जो लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने इसे संविधान की मूल संरचना के सिद्धांत का उल्लंघन बताते हुए आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। कांग्रेस का तर्क है कि यदि किसी उम्मीदवार के खिलाफ केवल मामला दर्ज हो और उस पर अदालत द्वारा संज्ञान न लिया गया हो, तो उसे शपथ पत्र में अनिवार्य रूप से दर्ज करना आवश्यक नहीं है। पार्टी ने आयोग से जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया क्योंकि नामांकन वापसी की प्रक्रिया के लिए समय सीमित है।
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दिग्विजय सिंह ने कहा- फैसला असंवैधानिक
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद दिग्विजय सिंह ने भी रिटर्निंग ऑफिसर के निर्णय पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह फैसला पूरी तरह असंवैधानिक है और कांग्रेस इस मुद्दे पर एकजुट होकर कानूनी तथा लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ेगी। दिग्विजय सिंह ने कहा कि पार्टी का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग के समक्ष सभी तथ्य रख रहा है और आयोग के निर्णय के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने भरोसा जताया कि आयोग निष्पक्षता के साथ मामले की समीक्षा करेगा।
कांग्रेस के बड़े नेताओं ने रखा पक्ष
चुनाव आयोग से मिलने पहुंचे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, महासचिव जयराम रमेश, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, रणदीप सिंह सुरजेवाला, दीपा दासमुंशी, विवेक तन्खा और अभिषेक मनु सिंघवी शामिल थे। स्वयं मीनाक्षी नटराजन भी इस बैठक में मौजूद रहीं। बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग के समक्ष विस्तार से सभी तथ्य, दस्तावेज और कानूनी पहलू प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आयोग निष्पक्ष निर्णय लेकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा करेगा।
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नामांकन रद्द होने की वजह
दरअसल, भाजपा उम्मीदवार महेश केवट ने शिकायत दर्ज कराई थी कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन पत्र के साथ दिए गए शपथ पत्र में तेलंगाना में दर्ज एक मुकदमे का उल्लेख नहीं किया। इस शिकायत पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया था। इसी फैसले के खिलाफ कांग्रेस अब चुनाव आयोग पहुंची है। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें खाली हुई हैं, जिनके लिए चुनावी प्रक्रिया जारी है। अब सभी की नजरें चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी हैं, जो इस विवाद की दिशा तय करेगा।












