छिंदवाड़ा में जहरीली गैस से एक युवक की मौत, दूसरे का इलाज जारी; सेप्टिक टैंक में उतरे और गंवाई जान

छिंदवाड़ा। सांस लेने में परेशानी और जी मिचलाने के बाद दोनों बेहोश हो गए, जिसके बाद लोगों ने उन्हें बाहर निकालकर तत्काल अस्पताल पहुंचाया। प्रारंभिक तौर पर बंद टैंक के अंदर बनी जहरीली गैस के कारण दोनों की तबीयत बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है, जबकि दियालाल धुर्वे का इलाज जारी है।
सेंटरिंग खोलने टैंक के अंदर उतरे दोनों युवक
जानकारी के अनुसार कुर्सी ढाना निवासी मोहन पिता जोगीलाल कुमरे (35) और दियालाल धुर्वे (36) शुक्रवार को नए बने सेप्टिक टैंक की सेंटरिंग खोलने के लिए उसके अंदर उतरे थे। कुछ ही देर बाद दोनों को सांस लेने में परेशानी होने लगी और उनकी हालत बिगड़ गई। दोनों के बेहोश होने पर मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें बाहर निकाला।
ये भी पढ़ें: छिंदवाड़ा में गैस एजेंसी की मनमानी का आरोप, समय पर सिलेंडर नहीं मिलने से उपभोक्ता परेशान
इलाज के दौरान मोहन की मौत
इसके बाद दोनों को गंभीर हालत में तामिया अस्पताल ले जाया गया। उपचार के दौरान मोहन कुमरे की मौत हो गई, जबकि दियालाल धुर्वे का इलाज जारी है। उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
बंद टैंक में गैस बनने की आशंका
शुरूआती तौर पर आशंका जताई जा रही है कि लंबे समय से बंद रहे नए सेप्टिक टैंक के अंदर बनी जहरीली गैस के कारण दोनों की तबीयत बिगड़ी। हालांकि मौत की वास्तविक वजह चिकित्सकीय जांच और संबंधित जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
हादसे ने उठाए सुरक्षा पर सवाल
सेप्टिक टैंक, कुएं या अन्य बंद स्थानों में ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैस जमा होने का खतरा रहता है। ऐसे स्थानों में बिना सुरक्षा उपकरण और गैस की जांच के अंदर उतरना जानलेवा हो सकता है। कुर्सी ढाना की घटना ने एक बार फिर ऐसे कामों में सुरक्षा सावधानियों की जरूरत को सामने ला दिया है।




















