जबलपुर। चरगवां रोड पर स्थित हिनौता गांव में चार एकड़ के एक सामान्य दिखने वाले बागान में इन दिनों किसी बड़े वीवीआईपी की तरह सुरक्षा का सख्त पहरा है। यहां की सुरक्षा व्यवस्था को देखकर हर कोई हैरान है क्योंकि यहां न तो कोई बड़ा राजनेता रहता है और न ही कोई फिल्मी सितारा बल्कि यहां दुनिया के सबसे दुर्लभ और महंगे फल यानी मियाजाकी आम की हिफाजत की जा रही है।यहां विश्व की महंगी 50 प्रजातियों के आम उगाए जाते हैं। जिनकी हिफाजत के लिए दर्जन भर हथियारबंद सुरक्षा गार्ड, 20 शिकारी कुत्ते और 15 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
पिछले साल चोरों ने धावा बोला थासंकल्प परिहार और उनकी पत्नी रानी सिंह परिहार द्वारा संचालित श्री महाकालेश्वर हाइब्रिड फार्म हाउस इन दिनों वैश्विक स्तर पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस बागान की सुरक्षा के लिए जो इंतजाम किए गए हैं वे उच्च स्तर के हैं। परिसर के चप्पे-चप्पे पर पंद्रह से अधिक हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे चौबीस घंटे नजर रखते हैं। वहीं सुरक्षा का जिम्मा सत्रह विदेशी जर्मन शेफर्ड और तीन देसी कुत्तों के हवाले है जो बागान के हर कोने में दिन-रात पेट्रोलिंग करते हैं। इन हथियारों से लैस गार्ड्स और सुरक्षा प्रबंधों के पीछे की कहानी महज दिखावा नहीं बल्कि एक दर्दनाक घटना से जुड़ी हुई है। बीते साल इस बागान में चोरों ने धावा बोला था और भारी मात्रा में कीमती आमों पर हाथ साफ कर दिया था। उस वक्त चोरों से मुकाबला करते हुए बागान की वफादार कुतिया जैरी बुरी तरह घायल हो गई थी।
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इस बागान की मुख्य आकर्षण जापान की मियाजाकी किस्म है जिसे आम की दुनिया में सूर्य का अंडा कहा जाता है। पकने के बाद गहरा लाल और बैंगनी रंग लेने वाला यह फल न केवल अपनी सुंदरता बल्कि अपने गुणों के लिए भी प्रसिद्ध है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 2.70 लाख रुपए प्रति किलो तक जा पहुंचती है। तीन सौ पचास ग्राम वजन वाले इस आम में प्राकृतिक शर्करा की भरपूर मात्रा होती है और यह एंटीऑक्सीडेंट्स का भंडार माना जाता है जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ने में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक है।
फार्म में आम की फसल गर्मी के चार महीनों में सर्वाधिक आती हैं जिन्हें विदेश निर्यात किया जाता है। आमों की चोरी न हो इसके लिए सुरक्षा एजेंसी से करीब दर्जन भर सशस्त्र गार्ड लिए जाते हैं इनका करीब डेढ़ लाख रुपए महीना वेतन दिया जाता है। वहीं जर्मन शेफर्ड कुत्ते क्रमश: खरीदकर इन्हें पौष्टिक आहार देकर तैयार किए जाते हैं। इनका खर्च भी करीब 1 लाख रुपए महीना आता है। वर्ष के 8 महीने सामान्य चौकीदार व कुत्ते ही फार्म की हिफाजत करते हैं।
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उनके चार एकड़ के इस फार्महाउस में अफगानिस्तान और अमेरिका से लेकर चीन और नेपाल तक की पचास से अधिक विदेशी प्रजातियां मौजूद हैं। इनमें अफगानिस्तान का प्रसिद्ध नूरजहां आम शामिल है जिसका वजन पांच किलो तक हो सकता है। इसके अलावा चीन का आइवरी आम जो अपनी सफेद रंगत के लिए जाना जाता है और अमेरिका का ब्लैक मैंगो जो अपनी पूरी तरह काली त्वचा के कारण लोगों को अचंभित करता है। अमेरिका की सेंसेशन प्रजाति अपनी मनमोहक खुशबू के लिए प्रसिद्ध है जबकि नेपाल की केसर बादाम और मलेशिया की जंबो ग्रीन किस्में इस बागान की विविधता का प्रमाण देती हैं।
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संकल्प परिहार और रानी सिंह परिहार इस अनमोल विरासत को सहेजने के लिए बेहद पारंपरिक और आधुनिक तरीकों का समावेश करते हैं। यहां खेती की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑर्गेनिक है और रसायनों या कीटनाशकों का नामोनिशान नहीं है। हर एक फल को पक्षियों और कीड़ों से बचाने के लिए उन्हें विशेष रूप से तैयार किए गए ग्रो बैग्स में पैक किया जाता है। गर्मी के मौसम में भीषण लू से फसलों को बचाने के लिए पूरे बागान को ग्रीन नेट के नीचे रखा गया है।