रायपुर:नगर निगम ने बढ़ाया यूजर चार्ज, कांग्रेस ने झाड़ू लगाकर किया विरोध

रायपुर। यूजर चार्ज में बढ़ोतरी के बाद राजधानी में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस इसे जनता पर अतिरिक्त बोझ बता रही है, तो दूसरी ओर नगर निगम फैसले को पूर्व निर्धारित व्यवस्था का हिस्सा बता रहा है। इसी बीच सफाई ठेकेदारों की हड़ताल ने शहर की स्वच्छता व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। बारिश से पहले गंदगी बढ़ने से लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है।
बढ़े यूजर चार्ज से जनता में नाराजगी
नगर निगम के नए निर्णय के बाद घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अतिरिक्त शुल्क का भार बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि पहले से बढ़ती महंगाई ने घरेलू बजट को प्रभावित कर रखा है। ऐसे में नए शुल्क से आम और मिडिल क्लास फैमिली की मुश्किलें और बढ़ेंगी। नागरिकों का तर्क है कि जब तक सफाई व्यवस्था पूरी तरह संतोषजनक नहीं होती, तब तक अतिरिक्त शुल्क लेना उचित नहीं माना जा सकता। इस फैसले को लेकर कई वर्गों में असंतोष दिखाई दे रहा है।
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कांग्रेस ने शुरू किया विरोध अभियान
यूजर चार्ज बढ़ोतरी के विरोध में कांग्रेस मैदान में उतर आई है। तेलीबांधा तालाब क्षेत्र में हस्ताक्षर अभियान चलाकर लोगों का समर्थन जुटाया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इसे जनहित के खिलाफ निर्णय बताते हुए आंदोलन को और व्यापक करने की बात कही है। उनका कहना है कि नियमित कचरा उठाना और बेहतर सफाई सुनिश्चित होने के बाद ही इस तरह का शुल्क लिया जाना चाहिए।
महापौर ने कांग्रेस पर साधा निशाना
महापौर मीनल चौबे ने बढ़े हुए यूजर चार्ज को लेकर कांग्रेस के विरोध पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2022 में कांग्रेस की परिषद ने ही इस शुल्क वृद्धि का निर्णय लिया था। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने वाली एजेंसी के साथ हुए एग्रीमेंट में भुगतान की व्यवस्था यूजर चार्ज से करने का प्रावधान रखा गया था। नगर निगम का दावा है कि वर्तमान निर्णय उसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
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ठेकेदारों ने कामबंद हड़ताल शुरू की
इधर सफाई ठेकेदारों ने भुगतान नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए कामबंद हड़ताल शुरू कर दी है। ठेकेदारों का कहना है कि पिछले चार महीनों से उन्हें भुगतान नहीं किया गया है। हड़ताल का असर राजधानी के सभी 70 वार्डों में दिखाई देने लगा है और कई इलाकों में कचरा जमा होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। बरसात के मौसम से पहले सफाई व्यवस्था प्रभावित होने से स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ गई हैं।












