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कोई भारंगम में देगा नाट्य प्रस्तुति तो किसी ने दिल्ली में दिया प्रेजेंटेशन

नेशनल यूथ डे: अलग-अलग क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखा रहे भोपाल के युवा
कोई भारंगम में देगा नाट्य प्रस्तुति तो किसी ने दिल्ली में दिया प्रेजेंटेशन

अनुज मैना- 12 जनवरी को युगदृष्टा स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन पूरे देश में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है और यह संदेश देता है कि अपनी सारी ऊर्जा समेटकर देश की प्रगति व लक्ष्य प्राप्ति में लगा दो। उनके विचार आज भी युवाओं में प्रेरणा और ऊर्जा भरने का कार्य करते हैं। ऐसे ही कुछ युवाओं से राष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर आईएम भोपाल ने बात की। इनमें किसी के नाटकों का मंचन दिल्ली में होने वाले प्रसिद्ध भारत रंग महोत्सव (भारंगम) में होगा, तो कोई युवा दिवस के अवसर पर भारत मंडपम नई दिल्ली में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय युवा महोत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संवाद करेगा।

भारत रंग महोत्सव में आदर्श देंगे नाट्य प्रस्तुति

भारत रंग महोत्सव (भारंगम) में इस बार भोपाल के तीन नाटकों की प्रस्तुति दी जाएगी। इनमें दो नाटकों की प्रस्तुति युवा रंग निर्देशक आदर्श शर्मा के संयोजन में होंगी। आदर्श शर्मा बताते हैं कि उनके गुरु स्व. केजी त्रिवेदी का सपना था कि उनके नाटक की प्रस्तुति भारंगम में दी जाए। इस बार उनके नाटक ‘नर-नारी’ की प्रस्तुति 4 फरवरी को खैरागढ़ में दी जाएगी। वहीं, दूसरी प्रस्तुति 11 फरवरी को नाटक ‘पुरुष’ की दिल्ली में होगी। आदर्श ने बताया कि खैरागढ़ म्यूजिकल यूनिवर्सिटी है और हमारा नाटक ‘नर-नारी’ भी म्यूजिकल नौटंकी शैली में है। इसमें लाइव म्यूजिक है, जो कलाकार मंच पर ही गाते हैं, इसलिए हमें इस नाटक के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ रही है, क्योंकि नाटक के म्यूजिक में कोई भी कमी हुई तो पूरी परफॉर्मेंस पर असर पड़ेगा।

प्रेजेंटेशन में दिखाई वेद संग्रहालयों की कल्पना

बरकतउल्ला विवि की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के वॉलेंटियर राहुल लोधी का चयन ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2025’ के लिए हुआ है। राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इस कार्यक्रम में राहुल ने ‘विकास भी विरासत भी’ विषय पर अपनी प्रस्तुति दी। राहुल ने बताया कि उन्होंने अपने विषय ‘विकास भी विरासत भी’ को ध्यान में रखते हुए पीपीटी प्रेजेंटेशन तैयार करना था। इसको लेकर उन्होंने अपने प्रेजेंटेशन में दिखाया कि हम शंकराचार्य के चारों मठों की तरह ही भारत के चारों ओर अपने वेदों को संकलित कर संग्रहालय बनवा सकते हैं, ताकि विकास के साथ-साथ हम अपनी विरासत को भी सहेज सकें। मेरा प्रयास है कि भारत अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित रखते हुए तकनीकी और सामाजिक विकास की ऊंचाइयों तक पहुंचे।

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By People's Reporter

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