भोपाल। मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा में स्वीकार किया कि यह घटना लापरवाही का परिणाम थी। गुरुवार को आक्रामक रुख के कारण आलोचनाओं का सामना करने के बाद उन्होंने सदन में संयमित तरीके से अपनी बात रखी और कहा कि यह घटना देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर पर कलंक के समान है, जिसे शहर अपनी जीवटता से जल्द मिटा देगा। उन्होंने इंदौर शहर को अपनी मां बताया और कहा कि मैं 9 बार इंदौर से चुनाव जीता हूं, इंदौर की जनता मुझे आशीर्वाद देती है।
विजयवर्गीय ने बताया कि नागरिकों ने पानी की गुणवत्ता को लेकर पहले ही शिकायतें की थीं। महापौर द्वारा टेंडर भी बुलाए गए थे, लेकिन प्रक्रिया में देरी हुई और समय पर काम शुरू नहीं हो सका। मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा गठित समिति ने कुछ अधिकारियों को दोषी पाया, जिन पर कार्रवाई की गई। उन्होंने राहत कार्यों में प्रशासन, समाज और कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ताओं की भूमिका की सराहना भी की।
मंत्री ने जानकारी दी कि डायरिया के कारण 22 लोगों की मौत हुई, जिनके परिजनों को 44 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया है और इसे बढ़ाने पर विचार हो रहा है। भागीरथपुरा में 13 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, जबकि 16 किलोमीटर और बिछाई जा रही है। फिलहाल 55 टैंकरों के जरिए जल आपूर्ति की जा रही है और स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर जांच कर रही हैं।
विजयवर्गीय ने कहा कि अब पूरे मध्यप्रदेश में दूषित जल की समस्या से निपटने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। अमृत वन और अमृत-2 योजनाओं के तहत करीब 2261 करोड़ रुपए के काम चल रहे हैं। पानी की नियमित जांच की जा रही है और प्रभावित लोगों की स्वास्थ्य निगरानी जारी है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर चर्चा से बचने और आंकड़े छिपाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों पर कार्रवाई जाति देखकर की गई। इस पर विजयवर्गीय ने आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया कि कार्रवाई में जाति का कोई आधार नहीं था। सिंघार ने दोषियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने और मंत्री के इस्तीफे की मांग भी की।
दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस के बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विपक्ष के स्थगन प्रस्तावों को खारिज कर दिया। इससे पहले भी इस मुद्दे पर विजयवर्गीय और सिंघार के बीच विवाद हुआ था, जिसमें आवेश में की गई टिप्पणी के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव को सदन में क्षमा मांगनी पड़ी थी।