कोई पहली बार जंगल गया तो किसी ने सुनी बाघ की दहाड़

कान्हा नेशनल टाइगर रिजर्व में फ्रंट लाइन स्टाफ के परिवारों ने किया पार्क के कोर एरिया का भ्रमण
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कोई पहली बार जंगल गया तो किसी ने सुनी बाघ की दहाड़

हर्षित चौरसिया-जबलपुर। कान्हा टाइगर रिजर्व में वर्षों से सेवाएं दे रहे वनकर्मी कमलेश चौहान के परिवार ने पहली बार कान्हा टाइगर रिजर्व की सफारी की। पीपुल्स समाचार से सफारी के बाद अपने अनुभव को साझा करते हुए कमलेश की पत्नी दीपिका ने बताया कि उन्होंने जंगल में घूमने को अच्छा अवसर प्राप्त हुआ। वन्यजीवों को देखकर उनके बेटा और बेटी बहुत उत्साहित हैं। दीपिका का कहना है कि उनका परिवार अगली बार भी कान्हा पार्क के भ्रमण के लिए आएगा। मुक्की रेंज में सेवाएं दे रहे परसादी लाल सरोते ने भी अपने परिवार और बेटे-बहू को पहली बार जंगल की सफारी कराई।

उनकी बिटिया करिश्मा और बहू ने बताया कि जंगल में बाघ देखने के लिए पूरा परिवार उत्साहित था। यहां पर बाघ तो दिखाई नहीं दिया, लेकिन उन्होंने मोर का नृत्य देखा और बारहसिंगा, गौर, चीतल, का भी दीदार किया। इसके अलावा कई ऐसे पक्षी देखे जो पहले कभी नहीं देखे थे। करिश्मा ने बताया कि वे कान्हा के जंगल के कोर जोन में वह पहली बार पहुंचीं। कान्हा की सुंदरता के बारे में बहुत सुना था, लेकिन इसकी खूबसूरती देखने का मौका अब मिला।

परिवार के साथ रहने से कम होता है तनाव

कान्हा रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय कुमार सिंह ने बताया फ्रंट लाइन स्टाफ और उनके परिवार को पार्क भ्रमण कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य है कि स्टाफ परिवार के साथ कुछ समय पर्यावरण के बीच बिताए। इससे वन क्षेत्र में 24 घंटे सेवा में तत्पर वनकर्मियों का तनाव कम होता है और उनका परिवार भी वन्यप्राणियों के बारे में जान पाता है। वहीं वे यह भी समझ पाते हैं कि वनकर्मी कितनी कठिनाई से अपने काम को बखूबी करते हैं।

कान्हा के जंगल के बारे में पति से कई बार सुना था, लेकिन वन और वन्यजीवों को देखने का मौका पहली बार मिला। जंगल में बारहसिंगा, मोर, बायसन दिखाई दिए। बाघ नहीं दिखा पर उसकी दहाड़ से मेरे व बच्चों के रोंगटे खड़े हो गए। - वनकर्मी कमलेश की पत्नी दीपिका चौहान

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By People's Reporter
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