पीपुल्स संवाददाता, जबलपुर। प्रदेश की अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था के मामले पर मंगलवार को मप्र हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा- ‘हाल ही में एक जिला कोर्ट की दीवार गिरने से एक जज घायल हुए।
(बेंच ने इस घटना का कोई ब्यौरा साझा नहीं किया) वहीं, सोमवार को जबलपुर की कोर्ट में बम फोड़ दिया गया। ये दोनों घटनाएं बताती हैं कि सरकार अदालतों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं हैं?’ बेंच ने सरकार को 31 मार्च तक सुरक्षा को लेकर विस्तृत ब्यौरा पेश करने कहा है।
गौरतलब है कि जजों की सुरक्षा के मुद्दे पर मप्र उच्च न्यायालय द्वारा संज्ञान लेकर वर्ष 2016 से एक जनहित याचिका पर सुनवाई की जा रही है। इस मामले पर सरकार द्वारा पेश की गई एक्शन टेकन रिपोर्ट के विरोध में हाईकोर्ट प्रशासन ने उसकी कमियां बताकर हाईकोर्ट में अपनी आपत्ति दाखिल की थी।
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मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से अधिवक्ता बीएन मिश्रा और हस्तक्षेपकर्ता जजेस एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता केसी घिल्डियाल और राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता अनुभव जैन हाजिर हुए। सुनवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में कमियों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए बेंच ने सुरक्षा के इंतजामों को लेकर सरकार को जवाब पेश करने के निर्देश दिए।
मप्र सरकार की एक्शन टेकन रिपोर्ट के बाद उच्च न्यायालय प्रशासन ने प्रदेश की निचली अदालतों की मौजूदा स्थिति को लेकर विस्तृत जवाब दाखिल किया है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार नरेश एम सिंह द्वारा दाखिल जवाब में कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं।
-प्रदेश की 29 जिला न्यायालयों में चहारदीवारी ही नहीं हैं।
- 27 जिले की तहसील कोर्टों में बाउण्ड्रीवॉल छोटी हैं।
- प्रदेश की सिर्फ 5 जिला कोर्ट परिसरों में पुलिस चौकियां हैं।
- 5 जिलों में जजों और उनके स्टॉफ की सुरक्षा के इंतजाम नहीं।
- 28 जिलों में जजों और उनके परिवारों की सुरक्षा नाकाफी हैं।