श्योपुर। विजयपुर तहसील में पदस्थ तहसीलदार अमिता सिंह तोमर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। 2021 के बहुचर्चित बाढ़ राहत घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका मंगलवार को खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि मामले में राहत देने का कोई ठोस आधार नहीं बनता। इससे पहले हाईकोर्ट भी उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुका था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। न्यायाधीशों ने संबंधित सभी लंबित आवेदनों को भी समाप्त कर दिया। अब उनकी गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है।

वर्ष 2021 में आई बाढ़ के बाद बड़ौदा तहसील में 794 हितग्राहियों के नुकसान का आकलन किया गया था। राहत वितरण के दौरान 127 फर्जी खातों में करीब 2.57 करोड़ रुपए ट्रांसफर होने का मामला सामने आया। ऑडिट में गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद जांच शुरू हुई, इसमें डिप्टी कलेक्टर ने कई लोगों को आरोपी बनाया और कुछ से राशि वसूल भी की गई।
जांच में 25 पटवारी समेत 110 लोगों को आरोपी बनाया गया। इसमें अमिता सिंह तोमर का नाम भी शामिल है, जो उस समय बड़ौदा में तहसीलदार थीं। पुलिस विवेचना में उनके परिजनों के खातों में लेन-देन के संकेत भी सामने आए। जांच के बाद बड़ौदा थाना पुलिस ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
एडवाकेट वीके शर्मा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद आरोपी के पास आत्मसमर्पण करना ही विकल्प बचता है। इसके बाद वह नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकता है, लेकिन प्रक्रिया के तहत उसे न्यायिक हिरासत में जाना पड़ता है।