MP में बनेंगे ‘श्रीकृष्ण तीर्थ’, जहां-जहां पड़े कान्हा के चरण; CM मोहन यादव का ऐलान

भोपाल के रविंद्र भवन में आयोजित सात दिवसीय रासलीला समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संदेश को याद किया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का पूरा जीवन संघर्ष और कठिन परिस्थितियों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने कभी चुनौतियों से मुंह नहीं मोड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन्म लेते ही जिनके जीवन पर संकट आ गया था, वही बालक आगे चलकर श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान देने वाले योगीराज श्रीकृष्ण बने। उन्होंने अपने कर्म और कर्तव्य के जरिए पूरी दुनिया को मार्ग दिखाया।
64 कलाओं और 14 विद्याओं में निपुण थे श्रीकृष्ण
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण सिर्फ महान योद्धा और कूटनीतिज्ञ ही नहीं थे, बल्कि ज्ञान और कलाओं के भी अद्भुत ज्ञाता थे। उन्हें 64 कलाओं और 14 विद्याओं में निपुण माना जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीकृष्ण के मुख से निकला श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान आज भी मानव जीवन को कर्म, कर्तव्य और धर्म का मार्ग दिखाता है।
MP में बनेंगे ‘श्रीकृष्ण तीर्थ’
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का मध्यप्रदेश से भी गहरा संबंध रहा है। उन्होंने मध्यप्रदेश में शिक्षा-दीक्षा प्राप्त की थी। अब प्रदेश सरकार उन सभी स्थानों को चिन्हित कर रही है, जहां भगवान श्रीकृष्ण के चरण पड़े थे। इन स्थानों को आगे ‘श्रीकृष्ण तीर्थ’ के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि वह 3 सितंबर को गुजरात के द्वारका के दौरे पर भी जाएंगे।
रासलीला में राधा-कृष्ण की जीवंत झांकी
रविंद्र भवन के मुक्ताकाश मंच पर आयोजित रासलीला समारोह में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मंचन किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राधा-कृष्ण की जीवंत झांकी में कलाकारों की आरती उतारी और उनका आशीर्वाद लिया। उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कलाकारों के प्रदर्शन की सराहना की। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर सभी को हलषष्ठी और जन्माष्टमी की शुभकामनाएं भी दीं।
गोवर्धन लीला ने दिया प्रकृति और भक्ति का संदेश
रासलीला समारोह के पांचवें दिन ब्रज के कलाकारों ने गोवर्धन लीला और रास से जुड़े प्रसंगों का मंचन किया। कार्यक्रम का निर्देशन मथुरा से आए माधव आचार्य ने किया। गोवर्धन लीला में दिखाया गया कि जब ब्रजवासी इंद्र पूजा की तैयारी कर रहे थे, तब बालकृष्ण ने उन्हें गोवर्धन पर्वत, गौवंश और प्रकृति के प्रति कृतज्ञ होने का संदेश दिया। इसके बाद ब्रजवासियों ने गोवर्धन पूजा की। इससे नाराज होकर इंद्र ने तेज बारिश कर दी। ब्रजवासियों की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठिका उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सभी को उसके नीचे सुरक्षित आश्रय दिया। गोवर्धन लीला को अहंकार पर विनम्रता, भय पर विश्वास और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता की जीत का प्रतीक माना जाता है।
रासलीला में भक्ति और आत्मसमर्पण का संदेश
गोवर्धन लीला के बाद श्रीकृष्ण की बांसुरी की धुन और गोपियों के प्रेम पर आधारित रासलीला प्रस्तुत की गई। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में रास को केवल प्रेम कथा नहीं, बल्कि जीवात्मा और परमात्मा के मिलन तथा अनन्य भक्ति का प्रतीक माना जाता है। श्रीकृष्ण की बांसुरी सुनकर गोपियों का उनकी ओर आकर्षित होना परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण का संकेत माना जाता है। इस तरह रासलीला के जरिए भक्ति, प्रेम और आत्मसमर्पण का आध्यात्मिक संदेश दिया गया।
कृष्ण भक्ति गीतों से गूंजा रविंद्र भवन
समारोह की पांचवीं शाम जबलपुर की रूपाली कुसुमकर और उनके साथियों ने कृष्ण भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। उनके भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम में ‘श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी’, ‘एक राधा एक मीरा’, ‘तेरे बगैर सांवरिया’, ‘श्याम तेरी बंसी’ और ‘मुकुट सिर मोर का’ जैसे भक्ति गीत प्रस्तुत किए गए। इसके अलावा ‘ओम नमः शिवाय’ और ‘राम सिया राम’ जैसे गीतों ने भी दर्शकों को भक्ति भाव से जोड़ा। रूपाली कुसुमकर के साथ गगनदीप और सोनाली कुसुमकर ने गायन में साथ दिया। विभिन्न वाद्य यंत्रों पर कलाकारों ने संगत कर कार्यक्रम को और प्रभावशाली बनाया।




















