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सोहागपुर की ग्राम पंचायतों में बड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों से टैक्स वसूली पर सवाल, नोटिस तक सीमित कार्रवाई

सोहागपुर की कई ग्राम पंचायतों में वेयरहाउस, फैक्ट्रियां, स्कूल, होटल और रिसोर्ट संचालित हैं। इनसे कर वसूली को लेकर सवाल उठे हैं, सीईओ ने नोटिस के निर्देश दिए।
सोहागपुर की ग्राम पंचायतों में बड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों से टैक्स वसूली पर सवाल, नोटिस तक सीमित कार्रवाई
ग्राम पंचायतों में बड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों से टैक्स वसूली पर सवाल

सोहागपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे बड़े व्यावसायिक और औद्योगिक प्रतिष्ठानों से ग्राम पंचायतों द्वारा की जाने वाली कर वसूली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जनपद पंचायत क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में वेयरहाउस, फैक्ट्रियां, निजी स्कूल, होटल और रिसोर्ट संचालित होने के बावजूद इनसे नियमानुसार कर वसूली को लेकर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि बड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों की मौजूदगी के बावजूद पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए कर वसूली की प्रक्रिया कितनी प्रभावी है। करीब डेढ़ माह पहले जिला पंचायत के एक परियोजना अधिकारी ने ग्राम पंचायत सचिवों से बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से की जा रही कर वसूली की जानकारी मांगी थी। पंचायतों से यह भी पूछा गया था कि यदि ऐसे प्रतिष्ठानों से कर नहीं लिया जा रहा है तो उसके पीछे क्या कारण है। जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद कुछ पंचायतों में प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई की बात सामने आई, लेकिन आगे की प्रक्रिया अभी तक प्रभावी रूप से जमीन पर नजर नहीं आने के आरोप हैं।

कई पंचायतों में वेयरहाउस और फैक्ट्रियां

जनपद पंचायत क्षेत्र की रानी पिपरिया, अजनेरी, मोकलवाड़ी, शोभापुर, अकोला, करनपुर, बम्हौरीखुर्द, गुरमखेड़ी, सेमरी हरचंद और चीचली ग्राम पंचायतों में बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित होने की जानकारी है। इन क्षेत्रों में वेयरहाउस, फैक्ट्रियों और निजी स्कूलों के अलावा अन्य कारोबारी गतिविधियां भी संचालित हो रही हैं। वहीं टेकापार, मगरिया और कामती ग्राम पंचायत क्षेत्रों में होटल और रिसोर्ट स्थापित हैं। इनमें रानी पिपरिया क्षेत्र में पिछले कुछ समय में व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार तेजी से हुआ है। स्थानीय स्तर पर इसे जनपद पंचायत क्षेत्र के प्रमुख कारोबारी क्षेत्रों में शामिल किया जाने लगा है।

कर निर्धारण को लेकर उठ रहे सवाल

बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से कर वसूली के मामले में सबसे बड़ा सवाल कर निर्धारण और वास्तविक वसूली को लेकर है। स्थानीय स्तर पर यह जानने की जरूरत महसूस की जा रही है कि इन प्रतिष्ठानों का कर किस आधार पर तय किया जा रहा है और तय राशि के मुकाबले वास्तव में कितनी राशि पंचायतों को प्राप्त हो रही है। कुछ स्थानों पर कर वसूली की प्रक्रिया केवल औपचारिकता तक सीमित रहने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित बड़े प्रतिष्ठानों से नियमानुसार कर की वसूली सुनिश्चित की जाए तो ग्राम पंचायतों की आय में इजाफा हो सकता है। इससे पंचायतों के पास सड़क, नाली, स्वच्छता और अन्य स्थानीय विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।

डेढ़ माह पहले मांगी गई थी जानकारी

करीब डेढ़ माह पहले जिला पंचायत के एक परियोजना अधिकारी ने ग्राम पंचायत सचिवों से उनके क्षेत्र में संचालित बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और उनसे की जा रही कर वसूली की जानकारी मांगी थी। पंचायतों से यह भी पूछा गया था कि यदि किसी बड़े प्रतिष्ठान से कर वसूली नहीं की जा रही है तो उसकी वजह क्या है। इसके बाद कुछ पंचायतों में प्रतिष्ठानों की जानकारी जुटाने और कर से जुड़े रिकॉर्ड देखने की प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई। हालांकि अब सवाल यह उठ रहा है कि जानकारी जुटाने के बाद कर निर्धारण, नोटिस और वास्तविक वसूली की कार्रवाई कब तक शुरू होगी।

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सीईओ बोले- प्रतिष्ठानों को नोटिस देने के निर्देश

मामले में जनपद पंचायत सीईओ श्रीराम सोनी ने बताया कि ग्राम पंचायतों को संबंधित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। उनके अनुसार पंचायत स्तर पर संबंधित प्रतिष्ठानों के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई की जानी है। ऐसे में अब यह देखना होगा कि नोटिस जारी होने के बाद कर निर्धारण और वसूली की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है।

करनपुर पंचायत का दावा- तीन साल पहले दिया था नोटिस

वहीं करनपुर ग्राम पंचायत के सरपंच आजाद सिंह पटेल से जब संबंधित प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि पंचायत की ओर से करीब तीन वर्ष पहले नोटिस दिया गया था। सरपंच का कहना है कि वर्तमान में जनपद पंचायत या जिला स्तर से इस संबंध में उन्हें कोई लिखित निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। इस बयान के बाद प्रशासनिक स्तर पर पहले मांगी गई जानकारी और वर्तमान कार्रवाई के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए कार्रवाई जरूरी

ग्रामीण क्षेत्रों में व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने के साथ ग्राम पंचायतों के सामने स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने की जिम्मेदारी भी बढ़ रही है। ऐसे में बड़े प्रतिष्ठानों से नियमानुसार कर वसूली पंचायतों की आय का एक महत्वपूर्ण जरिया बन सकती है। फिलहाल मामला जानकारी जुटाने और नोटिस जारी करने की प्रक्रिया से आगे कितना बढ़ता है, यह देखने वाली बात होगी। यदि प्रशासन सभी संबंधित पंचायतों में प्रतिष्ठानों का व्यवस्थित सर्वे, कर निर्धारण और नियमानुसार वसूली सुनिश्चित करता है तो इससे पंचायतों को अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है।

Neelam Tiwari
By Neelam Tiwari

नीलम तिवारी - सोहागपुर के वरिष्ठ पत्रकार, 40 वर्षों से निष्पक्ष, जनसरोकार और ग्रामीण मुद्दों की निर्...Read More

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