PU Special :एमपी के एससी/एसटी छात्रावासों में राशन की किल्लत, साल में दो बार खाद्यान्न निर्धारित समय पर नहीं मिला

मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति-जनजाति विभाग के छात्रावासों में साल 2026 में दो बार सस्ता सरकारी खाद्यान्न नहीं मिलने से परेशानी खड़ी हो गई। छात्रावास अधीक्षकों को उधारी पर राशन लेकर छात्र-छात्राओं का पेट भरना पड़ा।
एमपी के एससी/एसटी छात्रावासों में राशन की किल्लत, साल में दो बार खाद्यान्न निर्धारित समय पर नहीं मिला
एमपी के एससी/एसटी छात्रावासों में राशन की किल्लत

विजय एस. गौर, भोपाल। मार्च से मई तक और फिर जुलाई से अगस्त तक राशन की आपूर्ति अटकी रही। सितंबर के मध्य में एक साथ तीन महीने का राशन दिया गया। सालों से यही स्थिति बनी हुई है, जिसके चलते हर साल तीन से चार महीने का राशन अटक जाता है।

साल में दो बार राशन नहीं मिलने से बिगड़े हालात

अनुसूचित जाति-जनजाति विभाग के छात्रावासों में चालू साल 2026 में दो बार सरकारी खाद्यान्न नहीं मिला। पहली बार मार्च से मई तक और दूसरी बार जुलाई से अगस्त तक राशन की आपूर्ति अटकी रही। इसके चलते छात्रावास अधीक्षकों को उधारी पर राशन लेकर छात्र-छात्राओं के भोजन की व्यवस्था करनी पड़ी।

ये भी पढ़ें: पांढुर्णा में मिड-डे मील पर संकट, रसोइया महिलाओं की हड़ताल से स्कूलों में नहीं बना खाना

एक रुपए किलो में मिलता है सरकारी खाद्यान्न

अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के छात्रावासी विद्यार्थियों को खाद्य विभाग की ओर से प्रतिदिन 400 ग्राम गेहूं और 100 ग्राम चावल दिया जाता है। यह खाद्यान्न एक रुपए प्रति किलो की रियायती दर पर उपलब्ध कराया जाता है। समय पर राशन नहीं मिलने पर छात्रावास अधीक्षकों को बाजार दर पर खाद्यान्न खरीदकर व्यवस्था करनी पड़ती है, जबकि उधारी पर लिए गए राशन की प्रतिपूर्ति शासन से नहीं होती।

हजारों छात्रावासों में लाखों विद्यार्थियों के लिए खाद्यान्न की जरूरत

प्रदेश में जनजातीय कार्य विभाग के 2,633 छात्रावास और आश्रम हैं, जिनमें 82,604 सीटें स्वीकृत हैं। वहीं, अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के 1,933 छात्रावासों में 1,00,152 सीटें स्वीकृत हैं। इन विद्यार्थियों के लिए हर महीने लगभग 4,296.58 मीट्रिक टन गेहूं और 1,074.14 मीट्रिक टन चावल की जरूरत होती है, यानी कुल मासिक खाद्यान्न मांग लगभग 5,370.72 मीट्रिक टन है।

Breaking News

राशन अटकने के पीछे आवंटन और विभागीय तालमेल में कमी

छात्रावासों में खाद्यान्न समय पर नहीं पहुंचने के प्रमुख कारणों में राशन का समय पर आवंटन नहीं होना, बजट और महंगाई का असंतुलन और प्रशासनिक और विभागीय तालमेल की कमी शामिल हैं। राशन का आवंटन जारी होने के बाद भी कई बार सरकारी राशन दुकानों की मशीन में इसकी जानकारी नहीं दिखती। ऐसे में अंगूठा नहीं लग पाने के कारण विद्यार्थियों के लिए राशन नहीं मिल पाता।

अधीक्षक बोले- हर साल तीन से चार महीने का राशन अटकता है

अजा छात्रावास फंदा के अधीक्षक राजीव सक्सेना के मुताबिक, हर साल तीन से चार महीने का राशन अटक जाता है और उधारी पर काम चलाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कई बार राशन का आवंटन हो जाने के बाद भी सरकारी राशन दुकान पर मशीन में जानकारी नहीं दिखती। इस वजह से अंगूठा नहीं लग पाता और खाद्यान्न नहीं मिल पाता।

ये भी पढ़ें: मिड-डे मील खाते ही 30 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, सांवेर के स्कूल में हड़कंप

खाद्य विभाग ने बताया, सत्यापन में देरी से अटका आवंटन

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के संचालक दिनेश जैन ने बताया कि ट्राइबल डिपार्टमेंट के छात्रावासों में विद्यार्थियों का रजिस्ट्रेशन होने के बाद जिला अधिकारी सत्यापन करते हैं। इसके बाद ही राशन का आवंटन जारी किया जाता है। जांच में सामने आया कि कई जिलों में सत्यापन देर से होने के कारण आवंटन में देरी हुई। समस्या के समाधान के लिए आदिमजाति विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों से बात की जा रही है, ताकि विद्यार्थियों की संख्या समय पर मिलने पर आवंटन जारी हो सके और सभी जगह एक साथ खाद्यान्न पहुंचाया जा सके।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

Latest Posts