देवास शराब कांड के तार इंदौर से जुड़े: दवा बाजार से केमिकल मंगाकर तैयार किया नकली मिश्रण

इंदौर/देवास। चंदाना-बिंजाना जहरीली शराबकांड की जांच में पुलिस ने कथित तौर पर नकली शराब तैयार करने और उसे लाइसेंसी शराब की पेटियों के जरिए बाजार में खपाने के नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने इंदौर के दवा बाजार से केमिकल मंगवाया और देवास जिले में अलग-अलग मकानों में केमिकल व पानी मिलाकर शराब जैसा मिश्रण तैयार किया। इसके बाद इसे बोतलों में भरकर लाइसेंसी शराब की पेटियों में शामिल कर दिया गया, ताकि नकली बोतलों को असली शराब के बीच छिपाकर बेचा जा सके।
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मामले में मुख्य आरोपी विनोद जायसवाल सहित 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस जांच में केमिकल की खरीद, मिश्रण तैयार करने, शराब की पेटियां जुटाने और कथित तौर पर नकली शराब बेचने की कड़ियां सामने आई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आबकारी अधिनियम की धारा 49-क भी जोड़ी है। अब जांच का दायरा इंदौर से देवास तक फैल गया है और पुलिस पूरे नेटवर्क की भूमिका खंगाल रही है।
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दवा बाजार से मंगाया केमिकल, गोदाम तक पहुंची जांच
पुलिस के मुताबिक, नकली शराब बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए केमिकल की बुकिंग 1 अक्टूबर को इंदौर के दवा बाजार स्थित एक गोदाम संचालक के कार्यालय से कराई गई थी। केमिकल लोहा मंडी स्थित महावीर मार्केट के एक गोदाम से मंगाया गया था।जांच में इस आपूर्ति से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि केमिकल किसने बुक कराया, भुगतान किसने किया और उसे देवास तक पहुंचाने की व्यवस्था किसने की थी।इस सिलसिले में पुलिस की एक टीम इंदौर के दवा बाजार स्थित कार्यालय और लोहा मंडी के गोदाम तक पहुंची है। अधिकारियों का उद्देश्य केमिकल की खरीद और आपूर्ति से जुड़े दस्तावेज जुटाना तथा आरोपियों के बीच संपर्क की कड़ियों को जोड़ना है।
देवास के मकानों में तैयार किया गया शराब जैसा मिश्रण
पुलिस जांच के अनुसार, केमिकल को देवास जिले के पूर्वादादाई गांव में अजय राठौर के मकान और लोहारपीपल्या में उसके साथी गोविंद के मकान तक पहुंचाया गया। आरोप है कि इन मकानों में केमिकल में पानी मिलाकर शराब जैसा मिश्रण तैयार किया गया।इसके बाद मिश्रण को बोतलों में भरकर लाइसेंसी शराब की पेटियों में शामिल कर दिया गया। पुलिस का आरोप है कि इस तरीके से नकली शराब को असली शराब के बीच मिलाकर बाजार में बेचा गया।जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि मिश्रण तैयार करने में किन रसायनों का इस्तेमाल किया गया था और उससे मानव स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ सकता था। मिश्रण की वास्तविक प्रकृति और उसकी विषाक्तता की पुष्टि संबंधित परीक्षण रिपोर्ट से ही होगी।
क्षिप्रा और भड़ापीपल्या की दुकानों से खरीदी गई थीं पेटियां
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने क्षिप्रा और भड़ापीपल्या स्थित लाइसेंसी शराब दुकानों से शराब की पेटियां खरीदी थीं। आरोप है कि इन पेटियों में नकली शराब की बोतलें मिलाकर चंदाना-बिंजाना क्षेत्र में बेचा गया।जांच के अनुसार, कथित अवैध बिक्री 6-7 अक्टूबर से 11-12 अक्टूबर के बीच हुई थी। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि कितनी पेटियों का इस्तेमाल किया गया, नकली शराब की कितनी बोतलें बाजार तक पहुंचीं और इस पूरे मामले में किसकी क्या भूमिका रही।लाइसेंसी शराब की पेटियों का इस्तेमाल किए जाने के आरोप ने जांच को महत्वपूर्ण बना दिया है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि पेटियां खरीदने और उनमें कथित तौर पर नकली बोतलें मिलाने की प्रक्रिया में शराब दुकानों के कर्मचारियों या अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।
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मुख्य आरोपी विनोद जायसवाल समेत 10 गिरफ्तार
कोतवाली पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी विनोद जायसवाल सहित 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में अजय उर्फ अज्जू राठौर, रामेश्वर सोनगरा, शराब दुकान के मैनेजर नितिन सोलंकी और चंद्रशेखर बैरागी, सेल्समैन सत्येंद्र ओझा और राजदेव पटेल के अलावा जुगल सिंह, राजेंद्र निनामा और विशाल चौहान शामिल हैं।मंगलवार को सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया। वहां से जुगल सिंह और राजेंद्र निनामा को जेल भेज दिया गया, जबकि विनोद जायसवाल सहित आठ आरोपियों को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर सौंपा गया।पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से केमिकल की खरीद, नकली शराब तैयार करने, बोतलों को लाइसेंसी शराब की पेटियों में मिलाने और कथित वितरण नेटवर्क के संबंध में पूछताछ की जा रही है।
इंदौर से देवास तक फैले नेटवर्क की पड़ताल
जांच में इंदौर के दवा बाजार और लोहा मंडी से लेकर देवास के गांवों और शराब दुकानों तक की कड़ियां सामने आने के बाद पुलिस पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि केमिकल मंगाने की योजना किसने बनाई, मिश्रण तैयार करने की जिम्मेदारी किन लोगों के पास थी और नकली शराब को बाजार में पहुंचाने का काम किसने संभाला।इसके साथ ही पुलिस कथित बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस अवैध कारोबार में कितने लोग शामिल थे और नकली शराब कितनी मात्रा में बेची गई।
आबकारी अधिनियम की धारा 49-क भी जोड़ी
पुलिस ने शुरुआत में अवैध शराब की जब्ती के मामले में आबकारी अधिनियम, 1915 की धारा 34(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया था। जांच के दौरान जहरीली या मानव उपयोग के लिए अनुपयुक्त शराब तैयार करने और बेचने से संबंधित तथ्य सामने आने के बाद मामले में धारा 49-क भी जोड़ी गई।



















