आईएएस अधिकारी से लिए गए सिग्नेचर सैंपल:फर्जी बरी आदेश तैयार करने की साजिश के आरोप

इंदौर -बहुचर्चित फर्जी फैसला कांड में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने शनिवार को महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा से हस्ताक्षर के नमूने ले लिए। लंबे समय से लंबित इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एसआईटी पिछले पांच वर्षों से प्रयासरत थी, लेकिन वर्मा लगातार कानूनी लड़ाई लड़ते हुए हस्ताक्षर के नमूने देने से बचते रहे। जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर संतोष वर्मा की दोबारा एसआईटी के समक्ष पेशी हुई। इस दौरान जांच अधिकारियों ने विवादित दस्तावेजों से मिलान के लिए उनके हस्ताक्षर के नमूने लिए। इन नमूनों को अब फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा, जिससे यह पता लगाया जा सके कि विवादित दस्तावेजों पर किए गए हस्ताक्षरों से उनका कोई संबंध है या नहीं।
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2021 में दर्ज हुई थी एफआईआर
मामले की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई थी, जब एमजी रोड थाने में संतोष पुत्र रुमाल सिंह वर्मा निवासी मंगल कॉलोनी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था। जांच के दौरान एसआईटी ने संतोष वर्मा को गिरफ्तार भी किया था, लेकिन बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। जांच एजेंसियों का आरोप है कि आईएएस अवार्ड से जुड़े एक मामले में फर्जी न्यायिक फैसला तैयार किया गया था। यह कथित फैसला तत्कालीन विशेष न्यायाधीश विजेंद्र सिंह रावत की अदालत से जारी होना दर्शाया गया था। दस्तावेज में न्यायाधीश के नाम के ऊपर "वी. रावत" के हस्ताक्षर अंकित थे, जिन्हें लेकर संदेह पैदा हुआ था।
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हस्ताक्षर देने से किया था इंकार
एसआईटी विवादित फैसले पर मौजूद हस्ताक्षरों और अन्य दस्तावेजों की जांच के लिए संतोष वर्मा के सिग्नेचर सैंपल लेना चाहती थी, लेकिन उन्होंने इसके लिए सहमति नहीं दी। इतना ही नहीं, उन्होंने जांच प्रक्रिया का विरोध करते हुए अदालत का दरवाजा भी खटखटाया था। जांच के दौरान पुलिस पहले ही तत्कालीन न्यायाधीश विजेंद्र सिंह रावत और न्यायालय कर्मी नीतू के हस्ताक्षर के नमूने ले चुकी थी। हालांकि संतोष वर्मा के नमूने नहीं मिलने से जांच आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
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जमानत निरस्त करने की मांग भी हुई थी
मामले में एसीपी विनोद दीक्षित ने सेशन कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत कर संतोष वर्मा की जमानत निरस्त करने की मांग भी की थी। पुलिस का तर्क था कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है और महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने में बाधा उत्पन्न कर रहा है। अब हस्ताक्षर के नमूने मिलने के बाद एसआईटी को उम्मीद है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट के जरिए मामले के कई महत्वपूर्ण पहलुओं से पर्दा उठ सकेगा। जांच एजेंसी का मानना है कि रिपोर्ट आने के बाद फर्जी फैसला कांड में आगे की कार्रवाई और तेज हो सकती है।
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