Karnataka Politics : सिद्धारमैया को क्या चाहिए? राहुल और खड़गे से मिले, कर्नाटक के पूर्व सीएम ने कही अपने मन की बात

नई दिल्ली। कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों तेज हलचल देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी सिद्धारमैया पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे हैं। दिल्ली में उनकी लगातार बैठकों ने यह साफ संकेत दे दिया है कि वह सिर्फ सत्ता छोड़कर किनारे बैठने वाले नेताओं में शामिल नहीं हैं। राज्यसभा जाने से इनकार और पार्टी नेतृत्व से लगातार संवाद के बाद अब सवाल उठ रहा है कि आखिर सिद्धारमैया की अगली राजनीतिक रणनीति क्या है।
राहुल गांधी से हुई अहम मुलाकात
दिल्ली में सिद्धारमैया ने राहुल गांधी से मुलाकात कर अपनी बात खुलकर रखी। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने साफ कहा कि पार्टी नेतृत्व के कहने पर उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया, लेकिन अब वह राज्यसभा नहीं जाना चाहते। माना जा रहा है कि सिद्धारमैया कर्नाटक की राजनीति में ही अपनी मजबूत भूमिका बनाए रखना चाहते हैं।
सत्ता से बाहर, लेकिन राजनीति से नहीं
सूत्र बताते हैं कि सिद्धारमैया चाहते हैं कि नई सरकार और संगठन में उनके समर्थकों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले। उन्होंने अपने बेटे यतेंद्र सिद्धारमैया को मंत्रिमंडल में शामिल करने समेत अपने करीबी नेताओं की सूची भी राहुल गांधी को सौंपी है। इससे साफ है कि वह भविष्य की सत्ता संरचना में अपनी राजनीतिक पकड़ कमजोर नहीं होने देना चाहते।
ये भी पढ़ें: मऊ में गरजे सीएम योगी: बोले-अब कोई माफिया धमका नहीं सकता, 21 साल पहले मऊ को जलाने का हुआ था प्रयास
खड़गे से भी की भविष्य की राजनीति पर चर्चा
राहुल गांधी से मुलाकात के बाद सिद्धारमैया ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी लंबी बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच कर्नाटक में नई सरकार के गठन और पार्टी में सिद्धारमैया की भूमिका को लेकर चर्चा हुई। इसी बीच चार अन्य विधायक भी खड़गे से मिलने पहुंचे, जिससे राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं।
कांग्रेस ने बताया सामान्य प्रक्रिया
बैठक में मौजूद कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि यह एक सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण बैठक थी। उन्होंने दावा किया कि सत्ता हस्तांतरण पूरी तरह सुचारू रहेगा और पार्टी के भीतर किसी प्रकार का टकराव नहीं है। हालांकि राजनीतिक जानकार इसे कांग्रेस के अंदर चल रही शक्ति संतुलन की कवायद मान रहे हैं।
डीके शिवकुमार की दावेदारी मजबूत
उधर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की मुख्यमंत्री पद की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि वह कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ सरकार गठन को लेकर अलग से चर्चा करेंगे। पार्टी नेतृत्व जल्द ही नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला ले सकता है।
ये भी पढ़ें: दिल्ली HC से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को झटका : X अकाउंट बहाल करने से इनकार, कहा- पोस्ट में कंटेंट आपत्तिजनक
संगठन में भी हो सकते हैं बड़े बदलाव
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस सिर्फ सरकार गठन तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि कर्नाटक संगठन में भी बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। पार्टी राज्य इकाई के पुनर्गठन पर विचार कर रही है ताकि आगामी चुनावों से पहले संगठनात्मक मजबूती बढ़ाई जा सके। इस मुद्दे पर भी दिल्ली में उच्च स्तर पर चर्चा हुई है।
विधायक दल की बैठक पर टिकी नजरें
अब सबकी निगाहें कांग्रेस विधायक दल की प्रस्तावित बैठक पर टिकी हैं, जिसमें नए नेता का चुनाव हो सकता है। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद कर्नाटक की नई राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी। पार्टी नेतृत्व किसी भी तरह का खुला विवाद सामने आने से बचना चाहता है।
ये भी पढ़ें: ट्विशा शर्मा मौत मामला: सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ को 5 दिन की CBI रिमांड, आमने-सामने बैठाकर होगी पूछताछ
सिद्धारमैया का अगला कदम अहम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिद्धारमैया फिलहाल कर्नाटक की राजनीति से दूर जाने के मूड में नहीं हैं। वह सत्ता से बाहर होकर भी प्रभावशाली भूमिका चाहते हैं। यही कारण है कि दिल्ली में उनकी सक्रियता और लगातार बैठकों ने कर्नाटक कांग्रेस की राजनीति को नई दिशा दे दी है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि वह पार्टी के भीतर कितनी बड़ी भूमिका निभाते हैं।












