कौन है लखन पटेल :जिनसे छीना गया पशुपालन विभाग, जानें कब लड़ा था पहला चुनाव

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग वापस लिए जाने के बाद उनकी चर्चा तेज हो गई है। देर रात हुए इस फेरबदल में उन्हें आनंद विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई, जबकि पशुपालन विभाग अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद संभालेंगे। आइए जानते हैं, आखिर कौन हैं लखन पटेल और उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा है।
SBI में 20 वर्षों तक सवाएं दी
मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री रहे लखन पटेल दमोह जिले की पथरिया विधानसभा सीट से विधायक हैं। राजनीति में आने से पहले उन्होंने करीब 20 वर्षों तक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में कृषि अधिकारी के रूप में सेवाएं दीं। कृषि विषय में एमएससी की पढ़ाई करने वाले लखन पटेल की पहचान कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों की समझ रखने वाले नेता के रूप में रही है। समाज सेवा के साथ-साथ उन्हें खेल-कूद में भी विशेष रुचि रही है।
कब लड़ा था पहला चुनाव?
लखन पटेल ने 2013 में पहली बार भाजपा के टिकट पर पथरिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्हें बसपा की रामबाई से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि भाजपा ने उन पर भरोसा कायम रखा और 2023 के चुनाव में फिर टिकट दिया। इस बार उन्होंने जीत दर्ज कर विधानसभा में वापसी की और बाद में मोहन यादव सरकार में पशुपालन एवं डेयरी विभाग का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया।
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अब कौनसा विभाग संभालेंगे लखन पटेल
दतिया उपचुनाव के बीच लखन पटेल अचानक चर्चा में आ गए, जब देर रात सरकार ने उनसे पशुपालन एवं डेयरी विभाग वापस लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दिया। बदले में उन्हें आनंद विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इस फैसले के पीछे सरकार ने कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं जारी हैं। फिलहाल इस बदलाव ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
8 पॉइंट्स में समझिए पूरा मामला
- लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग वापस लिया गया।
- अब उन्हें आनंद विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
- मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद पशुपालन विभाग संभालेंगे।
- उनके पास पहले से कई अहम मंत्रालय मौजूद हैं।
- सरकार ने बदलाव की वजह सार्वजनिक नहीं की है।
- राजनीतिक गलियारों में फैसले को लेकर अलग-अलग अटकलें लगाई जा रही हैं।
- सूत्रों के अनुसार, विभागीय कामकाज को लेकर सवाल उठे थे।
- हालांकि इन कारणों की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
क्यों किया गया ये फेरबदल
सरकार की ओर से विभाग बदले जाने की कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। सूत्रों के अनुसार, गौशालाओं के संचालन और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर कुछ शिकायतें सामने आई थीं। यह भी चर्चा है कि इन्हीं मामलों को लेकर पार्टी नेतृत्व की नाराजगी के बाद यह फैसला लिया गया। फिलहाल इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।











