शुजालपुर के अनुपम बने 'जीवनदाता'!अंगदान से तीन मरीजों की बदली किस्मत

शुजालपुर निवासी 34 वर्षीय अनुपम नालमे ने अपने अंगदान के जरिए मानवता की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद उनके परिवार ने साहस दिखाते हुए उनके अंगों को दान करने का निर्णय लिया, जिससे तीन जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिला।
अंगदान से तीन मरीजों की बदली किस्मत
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AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    शाजापुर। मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले में स्थित शुजालपुर के रहने वाले 34 वर्षीय अनुपम नालमे ने अपने जीवन के बाद भी तीन जरूरतमंद मरीजों को नई उम्मीद दी। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद उनके परिवार ने अंगदान का साहसिक और सराहनीय निर्णय लिया, जिसने कई जिंदगियां बचा लीं। यह घटना मानवता और सेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।

    ब्रेन हेमरेज के बाद हालत गंभीर

    परिजनों के अनुसार, 20 मार्च को अनुपम को अचानक गंभीर ब्रेन हेमरेज हुआ। इसके बाद उन्हें तुरंत वी-वन हॉस्पिटल ले जाया गया। हालत में सुधार न होने पर 22 मार्च को उन्हें CHL केयर हॉस्पिटल, इंदौर में भर्ती कराया गया।

    अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने दो बार जांच के बाद उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया। यह सुनकर परिवार के लिए यह समय बेहद कठिन था, लेकिन उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए एक बड़ा और मानवीय फैसला लिया।

    अंगदान के लिए परिवार हुआ सहमत

    ब्रेन डेड घोषित होने के बाद मुस्कान ग्रुप के सेवादारों ने परिजनों से बातचीत की और उन्हें अंगदान के महत्व के बारे में समझाया। काउंसलिंग के बाद परिवार ने अंगदान के लिए सहमति दे दी। परिवार का यह निर्णय न केवल अनुपम की इच्छा और व्यक्तित्व को दर्शाता है, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणा बन गया।

    गार्ड ऑफ ऑनर से दी गई अंतिम विदाई

    अंगदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अस्पताल परिसर में अनुपम को शहीदों की तरह सम्मान दिया गया। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। इस दौरान माहौल भावुक था और परिजन व अस्पताल स्टाफ सभी भावनाओं से भरे नजर आए।

    ग्रीन कॉरिडोर से तेजी से पहुंचाए गए अंग

    इंदौर में अनुपम के अंगों को समय पर पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। यह इंदौर का 67वां ग्रीन कॉरिडोर था, जिसके जरिए अंगों को बिना देरी के अस्पतालों तक पहुंचाया गया। इस व्यवस्था की मदद से अंगों को सुरक्षित और तेजी से ट्रांसप्लांट सेंटर तक पहुंचाया गया, जिससे मरीजों की जान बचाई जा सकी।

    तीन मरीजों को मिला नया जीवन

    अनुपम के अंगों से तीन अलग-अलग मरीजों को नया जीवन मिला। अनुपम का लिवर और एक किडनी CHL हॉस्पिटल में भर्ती दो मरीजों को प्रत्यारोपित किए गए। एक 44 वर्षीय महिला और एक 34 वर्षीय महिला को लिवर और किडनी मिली। दूसरी किडनी को ग्रीन कॉरिडोर के जरिए मात्र 4 मिनट में शैल्बी हॉस्पिटल पहुंचाया गया, जहां 39 वर्षीय पुरुष मरीज का सफल ट्रांसप्लांट किया गया। इस तरह अनुपम के अंगों ने तीन परिवारों में खुशियां लौटा दीं।

    अन्य अंगों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अलर्ट

    अनुपम के परिवार की इच्छा के अनुसार उनके अन्य अंगों जैसे हाथ, पैंक्रियाज, बोन, हार्ट वाल्व और छोटी आंत के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सोटो और नोटो द्वारा अलर्ट जारी किया गया था।

    हालांकि, कुछ तकनीकी कारणों और तत्काल जरूरत न होने की वजह से इन अंगों का उपयोग नहीं हो सका। अनुपम की त्वचा भी दान की गई, जिसका उपयोग अन्य मरीजों के इलाज में किया जाएगा।

    सिविल इंजीनियर थे अनुपम नालमे

    परिजनों के अनुसार, अनुपम पेशे से सिविल इंजीनियर थे और समाज सेवा में हमेशा सक्रिय रहते थे। वे जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे। उनकी यही सोच उनके अंगदान के रूप में आगे भी जीवित रही, जिससे कई लोगों को जीवनदान मिला।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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