सेंसेक्स 703 अंक गिरकर 76,848 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 208 अंक टूटकर 23,843 पर आ गया। ईरान-अमेरिका वार्ता विफल होने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर बाजार पर साफ दिखा। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भारतीय शेयर बाजार को दबाव में ला दिया है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी।
सोमवार को बाजार खुलते ही निवेशकों ने बड़े पैमाने पर बिकवाली शुरू कर दी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियां लाल निशान में कारोबार करती दिखीं। टाइटन, सन फार्मा, NTPC, पावर ग्रिड और भारती एयरटेल जैसे दिग्गज शेयरों में गिरावट रही। ऑटो और FMCG सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में नजर आए। हालांकि मेटल सेक्टर में अपेक्षाकृत कम गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों के सतर्क रुख के चलते बाजार पूरे दिन दबाव में बना रहा।
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ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में हुई लंबी बातचीत विफल रही। इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। अमेरिका द्वारा ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी की तैयारी की खबरों ने चिंता बढ़ाई। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा। ब्रेंट क्रूड 7% से ज्यादा उछलकर 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। तेल की कीमतों में तेजी से भारतीय बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना।
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विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने अप्रैल में अब तक 48 हजार 213 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं। हालांकि पिछले कारोबारी दिन उन्होंने हल्की खरीदारी भी की थी। बाजार में लगातार विदेशी निवेशकों की निकासी चिंता का विषय बनी हुई है। इसके साथ ही रुपये की स्थिति भी कमजोर होती नजर आ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, डॉलर के मुकाबले रुपया 93.50 से 94 तक जा सकता है। इससे बाजार में और अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।