अब तक दिल्ली से देहरादून का सफर जहां करीब पांच घंटे का होता था, वहीं इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद यह दूरी महज ढाई घंटे में पूरी की जा सकेगी। इस हाईवे पर वाहन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगे, जिससे यात्रियों को समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। तेज रफ्तार और बेहतर सड़क ढांचे के कारण यह मार्ग खासतौर पर पर्यटन और व्यापार के लिहाज से गेमचेंजर साबित हो सकता है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना से दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। एक्सप्रेसवे के चालू होने से खजूरी चौक जैसे ट्रैफिक जाम वाले इलाकों में दबाव कम होगा और आवाजाही ज्यादा सुगम हो जाएगी। पिछले चार महीनों से इस मार्ग पर ट्रायल रन चल रहा था, जो सफल रहा है।
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत इसका 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर है, जो एशिया में अपनी तरह का सबसे लंबा माना जा रहा है और राजाजी नेशनल पार्क क्षेत्र से होकर गुजरता है। इसके अलावा देहरादून के पास 340 मीटर लंबी ढाटकाली सुरंग भी बनाई गई है, जो यात्रा को और अधिक सहज और सुरक्षित बनाती है। ये दोनों संरचनाएं इस प्रोजेक्ट को तकनीकी रूप से खास बनाती हैं।
इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से उत्तर भारत के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। देहरादून, मसूरी और आसपास के पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी, जिससे पर्यटन उद्योग को बड़ा फायदा मिलेगा। साथ ही, व्यापारिक गतिविधियां भी तेज होंगी और लॉजिस्टिक्स की लागत कम होगी। कुल मिलाकर, यह एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास का नया इंजन बनकर उभरने वाला है।