मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को तेज गिरावट देखने को मिली, जिसने निवेशकों को चौंका दिया। सेंसेक्स में उच्च स्तर से 1,200 से अधिक अंकों की बड़ी गिरावट के साथ दो माह के निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 25,200 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। शेयर बाजार में आज सुबह सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ 83,207.38 अंक पर खुला। इसके बाद इसने 83,254.28 अंक के स्तर पर पहुंचकर दिन का उच्च बनाया। इसके बाद शुरू हुआ बिकवाली का दौर बाजार बंद होने तक जारी रहा। अंततः सेंसेक्स 1065.71 या 1.28% की गिरावट के साथ 82,180.47 अंक पर बंद हुआ। जबकि, एनएसई का निफ्टी में 353.00 अंक या 1.38% की गिरावट के साथ 25,232.50 के स्तर पर आ गया।

इस गिरावट के चलते बीएसई पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 9 लाख करोड़ रुपए घटकर 456 लाख करोड़ रुपए रह गया। यह लगातार दूसरा कारोबारी सत्र था जब बाजार में कमजोरी देखने को मिली, जिससे साफ संकेत मिलता है कि मौजूदा माहौल में निवेशकों का भरोसा काफी कमजोर है। शुरुआत में बाजार लगभग सपाट खुले थे। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, बिकवाली का दबाव तेज होता चला गया। खास तौर पर सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी सेक्टर के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिसने पूरे बाजार को नीचे खींच लिया। आईटी कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों और आगे के लिए सतर्क संकेतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।

इस गिरावट का एक बड़ा कारण कॉरपोरेट आय से जुड़ी निराशा रही। आईटी सेक्टर की प्रमुख कंपनियों के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे, जिससे यह आशंका गहराई कि निर्यात आधारित क्षेत्रों में मुनाफे की रफ्तार फिलहाल धीमी बनी रह सकती है। इससे बाजार में यह संदेश गया कि कंपनियों की कमाई में तेज सुधार आने में अभी समय लग सकता है। नतीजतन, निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए बिकवाली को प्राथमिकता दी। वैश्विक स्तर पर भी हालात अनुकूल नहीं रहे। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में व्यापारिक तनाव और नई टैरिफ चिंताओं ने निवेशकों की जोखिम लेने की इच्छा को कमजोर किया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ की धमकी ने वैश्विक व्यापार संबंधों को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी। इसका असर एशियाई और अमेरिकी बाजारों पर भी पड़ा, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों में भी दबाव देखने को मिला। वैश्विक माहौल में बढ़ती अनिश्चितता का सीधा असर घरेलू निवेश धारणा पर पड़ा।

इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ा दिया। विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार कई सत्रों से भारतीय शेयर बेच रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि वे फिलहाल जोखिम से बचने की रणनीति अपना रहे हैं। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कुछ हद तक खरीदारी कर बाजार को सहारा देने की कोशिश की, लेकिन उनकी खरीदारी इतनी मजबूत नहीं थी कि वह तेज गिरावट को रोक सके। बाजार में गिरावट के बीच निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ता दिखा। सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। जब शेयर बाजारों में अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव बढ़ता है, तो निवेशक आमतौर पर कीमती धातुओं जैसे सुरक्षित साधनों की ओर रुख करते हैं, और यही इस समय देखने को मिला। यह गिरावट कई घरेलू और वैश्विक कारकों का नतीजा है। कमजोर कॉरपोरेट नतीजे, आईटी सेक्टर पर दबाव, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और वैश्विक व्यापार तनाव ने मिलकर बाजार की धारणा को कमजोर किया।