Aniruddh Singh
19 Jan 2026
Aniruddh Singh
19 Jan 2026
Aniruddh Singh
19 Jan 2026
मुंबई। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार दबाव में नजर आया और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। दिनभर निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना रहा, जिसका मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता रही। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा ग्रीनलैंड से जुड़े विवाद में कई यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय व्यापार युद्ध की आशंकाएं फिर से गहराती दिखीं। इसके साथ ही मध्य-पूर्व में जारी तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इन वैश्विक संकेतों का असर घरेलू बाजार पर साफ नजर आया। कारोबार के दौरान निवेशकों ने मुनाफावसूली को तरजीह दी, जिससे बाजार पर दबाव बना। बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स दिन के अंत में करीब 324 अंक की गिरावट के साथ 83,246 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी भी कमजोर रहकर 25,600 के नीचे फिसल गया और लगभग 108.85 अंकों की गिरावट के साथ 25,585 पर बंद हुआ।

सेक्टोरल मोर्चे पर ज्यादातर सूचकांकों में बिकवाली देखने को मिली। मीडिया, ऑयल एंड गैस और रियल्टी जैसे सेक्टरों में 1 से 2 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप शेयरों में भी कमजोरी रही और यह इंडेक्स करीब आधा प्रतिशत टूटा, जबकि स्मॉलकैप शेयरों में दबाव ज्यादा रहा और इसमें लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट आई। हालांकि, कमजोर बाजार के बीच एफएमसीजी सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और निवेशकों को कुछ राहत दी। ऑटो सेक्टर भी सीमित बढ़त के साथ टिकता नजर आया। निफ्टी के प्रमुख शेयरों में विप्रो, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स और मैक्स हेल्थकेयर जैसे शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।

दूसरी ओर, इंटरग्लोब एविएशन, टेक महिंद्रा, कोटक महिंद्रा बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर और मारुति सुजुकी जैसे शेयरों ने बाजार की गिरावट के बावजूद मजबूती दिखाई। बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो गिरावट का दायरा काफी व्यापक रहा। कारोबार में शामिल कुल शेयरों में से बड़ी संख्या में स्टॉक्स लाल निशान में बंद हुए। 52-सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंचने वाले शेयरों की संख्या ज्यादा रही, जो यह संकेत देती है कि निवेशकों का जोखिम उठाने का रुझान फिलहाल कमजोर पड़ा है। वैश्विक घटनाक्रम और भू-राजनीतिक तनाव के चलते बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी, जो बाजार की आगे की दिशा तय कर सकते हैं। गिरावट की वजह से बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप गिरकर 465.12 लाख करोड़ 5.11 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर आ गया।