
इंदौर। शहर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का मामला सामने आने के बाद प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन में हड़कंप मच गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए इंदौर के कलेक्टर ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। उनके आदेश पर एसडीएम और तहसीलदार की टीम ने मेडिकल कॉलेज पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।
रैगिंग का मामला कैसे सामने आया?
यह घटना तब सामने आई जब कुछ जूनियर छात्रों ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ के माध्यम से अपने साथ हुई रैगिंग की जानकारी दी। सोशल मीडिया पर यह मामला वायरल होने के बाद प्रशासन ने तत्काल एक्शन लिया। ट्वीट में छात्रों ने आरोप लगाया कि हॉस्टल में सीनियर छात्रों द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।
छात्रों के बयान दर्ज किए
जांच के लिए भेजी गई टीम ने कॉलेज हॉस्टल का दौरा किया और वहां मौजूद छात्रों के बयान दर्ज किए। जांच अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है, जिसमें यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि रैगिंग की घटनाएं किस स्तर तक हुई हैं और इसके पीछे कौन जिम्मेदार हैं।
कॉलेज प्रबंधन ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
कॉलेज प्रशासन ने कहा है कि वे मामले की जांच में प्रशासन का पूरा सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि रैगिंग की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। कॉलेज प्रबंधन ने छात्रों को सुरक्षित माहौल देने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि रैगिंग के खिलाफ एंटी-रैगिंग कानूनों का पालन करते हुए आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिन छात्रों के बयान लिए गए हैं, उनसे रैगिंग के तौर-तरीकों और सीनियर्स द्वारा किए गए व्यवहार के बारे में विस्तार से जानकारी मांगी गई है।
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