सौर ऊर्जा से आत्मनिर्भर खेती का नया मंत्र : डॉ. राजकुमार मालवीय ने किसानों को बताया कम लागत में ज्यादा मुनाफे का मॉडल

सीहोर। जिले के ग्राम पंचायत पाड़लिया राम में आयोजित सौर कृषि यंत्र प्रशिक्षण कार्यक्रम ने किसानों के लिए आधुनिक और आत्मनिर्भर खेती का नया रास्ता खोल दिया। प्रशिक्षण के दूसरे दिन वैज्ञानिक डॉ. राजकुमार मालवीय ने किसानों को सौर ऊर्जा आधारित कृषि तकनीकों की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि अब खेती केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि किसान अपनी जरूरत से अधिक बिजली बेचकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकेंगे। कार्यक्रम में किसानों ने आधुनिक तकनीकों को लेकर उत्साह दिखाया और इन्हें अपनाने की इच्छा भी जताई।
सौर ऊर्जा बनेगी खेती की नई ताकत
प्रशिक्षण कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वैज्ञानिक डॉ. राजकुमार मालवीय ने कहा कि बदलते समय में सौर ऊर्जा किसानों के लिए सबसे भरोसेमंद और किफायती विकल्प बनकर उभर रही है। उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा अपनाने से खेती में बिजली और डीजल पर होने वाला खर्च काफी कम हो सकता है। इससे किसान आर्थिक रूप से मजबूत होंगे और खेती अधिक लाभकारी बन सकेगी।
सोलर वाटर पंपिंग सिस्टम से समय पर होगी सिंचाई
डॉ. मालवीय ने किसानों को सोलर वाटर पंपिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली समझाते हुए बताया कि इस तकनीक से सिंचाई के लिए पारंपरिक बिजली या डीजल इंजन पर निर्भरता लगभग समाप्त हो जाती है। पर्याप्त धूप मिलने पर खेतों में समय पर सिंचाई संभव होती है, जिससे फसलों की उत्पादकता बढ़ती है और लागत में उल्लेखनीय कमी आती है।
अब अतिरिक्त बिजली भी बनेगी कमाई का जरिया
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को ग्रिड से जुड़े सोलर सिस्टम की उपयोगिता भी समझाई गई। डॉ. मालवीय ने बताया कि यदि किसान अपनी आवश्यकता से अधिक बिजली का उत्पादन करते हैं तो उसे विद्युत ग्रिड में बेच सकते हैं। इससे खेती के साथ एक अतिरिक्त आय का स्थायी स्रोत विकसित होगा, जो भविष्य में किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
स्मार्ट खेती और ऊर्जा प्रबंधन पर विशेष जोर
कार्यक्रम में किसानों को ऊर्जा प्रबंधन, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली, सौर कृषि उपकरणों के सुरक्षित संचालन तथा उनके रखरखाव की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही डिजिटल तकनीकों के उपयोग से खेती को अधिक वैज्ञानिक, आधुनिक और ऊर्जा दक्ष बनाने के उपाय भी बताए गए। विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले समय में तकनीक आधारित खेती ही कृषि क्षेत्र का भविष्य तय करेगी।
विज्ञान और नवाचार गांव तक पहुंचाना जरूरी
वैज्ञानिक डॉ. मालवीय ने कहा कि खेती को लाभकारी बनाने के लिए विज्ञान, तकनीक और नवाचार को गांव-गांव तक पहुंचाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जब किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाएंगे, तभी खेती टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल और आर्थिक रूप से मजबूत बन सकेगी। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सौर ऊर्जा आधारित कृषि उपकरणों को अपनाकर ऊर्जा आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाएं।
किसानों ने दिखाई नई तकनीक अपनाने की उत्सुकता
प्रशिक्षण में शामिल किसानों ने सौर ऊर्जा आधारित कृषि तकनीकों को लेकर विशेष रुचि दिखाई। किसानों ने विशेषज्ञों से सोलर पंप, ऊर्जा प्रबंधन और उपकरणों के संचालन से जुड़े कई सवाल पूछे तथा इन्हें अपने खेतों में लागू करने की इच्छा व्यक्त की। प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में विज्ञान आधारित खेती को बढ़ावा देना और किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना रहा।
आत्मनिर्भर कृषि की ओर मजबूत कदम
आयोजकों ने बताया कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ कृषि में नवाचार को बढ़ावा देने का माध्यम बन रहे हैं। सौर ऊर्जा आधारित खेती न केवल लागत घटाएगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा बचत और किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यही मॉडल भविष्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।












